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आरबीआई ने यूसीबी को दी राहत, लोन नियमों में ढील

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) के लिए संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए, जिनमें असुरक्षित ऋण, आवास वित्त और प्रकटीकरण से जुड़े नियमों में बदलाव किया गया है, जबकि प्रमुख सावधानीपूर्ण सुरक्षा उपाय यथावत रखे गए हैं।

संशोधित ढांचे के तहत, यूसीबी अब अपने कुल ऋण पोर्टफोलियो का अधिकतम 20% तक असुरक्षित ऋण रख सकेंगे। हालांकि, प्राथमिकता क्षेत्र के तहत प्रति उधारकर्ता 50,000 रुपये तक के असुरक्षित ऋण को इस सीमा से बाहर रखा जाएगा, बशर्ते बैंक बिजनेस ऑथराइजेशन पात्रता मानदंड (ईसीबीए) का पालन करते हों।

भारतीय रिज़र्व बैंक ने असुरक्षित ऋण पर उधारकर्ता-स्तर की सीमा भी तय की है। इसके अनुसार, टियर-1 बैंकों के लिए यह सीमा 5 लाख रुपये, टियर-2 के लिए 7.5 लाख रुपये और टियर-3 व टियर-4 बैंकों के लिए 10 लाख रुपये निर्धारित की गई है।

इसके अलावा, नाममात्र सदस्यों को उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं की खरीद के लिए दिए जाने वाले ऋण की सीमा 2.5 लाख रुपये प्रति उधारकर्ता तय की गई है, जो बैंक के उपनियमों के प्रावधानों के अधीन होगी।

आवास ऋण के क्षेत्र में, टियर-3 और टियर-4 शहरी सहकारी बैंकों को अपने बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीतियों के आधार पर ऋण अवधि और स्थगन अवधि तय करने की अनुमति दी गई है। वहीं, टियर-1 और टियर-2 बैंकों के लिए अधिकतम आवास ऋण अवधि 20 वर्ष ही रहेगी, जिसमें निर्माणाधीन संपत्तियों के लिए अधिकतम 24 महीने का स्थगन शामिल है।

सावधानीपूर्ण उपायों के तहत, शहरी सहकारी बैंकों को अन्य बैंकों की सावधि जमा के विरुद्ध ऋण देने पर प्रतिबंध लगाया गया है, जबकि वे अपने स्वयं के जमा के विरुद्ध ऋण दे सकेंगे, बशर्ते इसके लिए बोर्ड-स्वीकृत नीति हो।

असुरक्षित ऋण की परिभाषा को भी तर्कसंगत बनाया गया है। अब वे ऋण, जो वेतन से लागू कटौती या अल्पकालिक प्राप्तियों से सुरक्षित हैं, उन्हें सुरक्षित ऋण के रूप में माना जा सकेगा।

पारदर्शिता बढ़ाने के लिए, भारतीय रिज़र्व बैंक ने असुरक्षित ऋण और नाममात्र सदस्यों को दिए गए ऋण से संबंधित विस्तृत खुलासे अनिवार्य किए हैं। इसमें कुल ऋण में उनकी हिस्सेदारी, परिसंपत्ति गुणवत्ता संकेतक जैसे एसएमए और एनपीए, प्रावधान स्तर तथा नाममात्र सदस्यों की संख्या और अनुपात शामिल होंगे।

ये संशोधित दिशा-निर्देश 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होंगे, या उससे पहले भी लागू किए जा सकते हैं, यदि संबंधित शहरी सहकारी बैंक इन्हें पूर्ण रूप से अपनाते हैं।

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