
ग्रामीण सहकारी बैंकों की आवास वित्त क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव बैंक (एमएससी बैंक) के प्रशासकीय बोर्ड के अध्यक्ष विद्याधर अनास्कर ने भारतीय रिजर्व बैंक को पत्र लिखकर ग्रामीण सहकारी बैंकों के लिए हाउसिंग लोन सीमा और ऋण अवधि संबंधी नियमों में संशोधन की मांग की है।
आरबीआई के विनियमन विभाग के मुख्य महाप्रबंधक को भेजे गए पत्र में अनास्कर ने ग्रामीण सहकारी बैंकों और शहरी सहकारी बैंकों के बीच ऋण सीमा में असमानता का मुद्दा उठाया।
उन्होंने कहा कि आरबीआई के 2022 के दिशानिर्देशों के अनुसार ग्रामीण सहकारी बैंक प्रति उधारकर्ता अधिकतम 75 लाख रुपये तक का हाउसिंग लोन दे सकते हैं, जबकि शहरी सहकारी बैंकों को उनकी श्रेणी के अनुसार प्रति आवास इकाई 3 करोड़ रुपये तक ऋण देने की अनुमति है।
अनास्कर ने कहा कि बढ़ती रियल एस्टेट कीमतों के कारण मौजूदा सीमा अब अपर्याप्त साबित हो रही है। मुंबई, पुणे और नासिक जैसे शहरों में सामान्य आवास की कीमतें एक करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी हैं, जबकि छोटे शहरों में भी आवास की कीमतें 75 लाख रुपये से ऊपर पहुंच गई हैं। इससे ग्रामीण सहकारी बैंक प्रतिस्पर्धा में पीछे रह जाते हैं।
उन्होंने आरबीआई से ग्रामीण सहकारी बैंकों के लिए हाउसिंग लोन सीमा बढ़ाकर 3 करोड़ रुपये करने की मांग की, ताकि उन्हें शहरी सहकारी बैंकों के समान अवसर मिल सकें। उनका कहना है कि इससे सहकारी बैंकों के कारोबार को बढ़ावा मिलेगा और ग्राहकों को बेहतर आवास वित्त सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
इसके अलावा, अनास्कर ने सुझाव दिया कि 1,000 करोड़ रुपये से अधिक नेटवर्थ वाले वित्तीय रूप से मजबूत ग्रामीण सहकारी बैंकों को निर्माणाधीन परियोजनाओं के लिए ऋण अवधि और मोरेटोरियम तय करने की स्वायत्तता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे ईएमआई का बोझ कम होगा और युवाओं के लिए आवास ऋण अधिक किफायती बन सकेगा।
यह पहल सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में बदलती बाजार परिस्थितियों के अनुरूप नियामकीय समानता और अधिक लचीलापन की बढ़ती मांग को दर्शाती है।



