
भारत के सबसे बड़े शहरी सहकारी बैंक, सारस्वत सहकारी बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 के ऑडिटेड आंकड़ों के अनुसार अपना कुल कारोबार 1.06 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचा दिया है।
107 वर्ष पुराने इस बैंक ने कुल कारोबार में 16.13% की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। 31 मार्च 2025 को 91,814 करोड़ रुपये से बढ़कर 31 मार्च 2026 को यह 1,06,625 करोड़ रुपये हो गया। 14,811 करोड़ रुपये की यह बढ़ोतरी बैंक के इतिहास की सबसे बड़ी वार्षिक वृद्धि है।
इस उपलब्धि में जमा और ऋण, दोनों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। बैंक की जमा राशि 8,680 करोड़ रुपये (15.6%) बढ़कर 64,161 करोड़ रुपये हो गई, जबकि ऋण 6,131 करोड़ रुपये (16.9%) बढ़कर 42,464 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
कई चुनौतियों के बावजूद बैंक ने मजबूत प्रदर्शन किया। घोटाले से प्रभावित न्यू इंडिया सहकारी बैंक के सफल एकीकरण ने इसकी संचालन क्षमता और सुदृढ़ प्रशासनिक ढांचे को दर्शाया है। हालांकि, अधिग्रहण लागत के अमॉर्टाइजेशन और निवेश से जुड़े प्रावधानों के कारण शुद्ध लाभ थोड़ा घटकर 494 करोड़ रुपये रह गया, जो पिछले वर्ष 518 करोड़ रुपये था। इसके बावजूद बैंक की वित्तीय स्थिति मजबूत बनी हुई है।
बैंक के अध्यक्ष गौतम ठाकुर ने कहा कि यह उपलब्धि पूरी टीम के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक, सहकारिता मंत्रालय और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
एसेट गुणवत्ता के मोर्चे पर भी बैंक ने सुधार दर्ज किया है। सकल एनपीए घटकर 1.82% रह गया, जो पहले 2.25% था। वहीं, बैंक की स्वयं की पूंजी बढ़कर 5,605.84 करोड़ रुपये हो गई है।
विस्तार रणनीति के तहत बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 में 15 नई शाखाएं शुरू कीं, जिससे कुल शाखाओं की संख्या बढ़कर 326 हो गई। बैंक अब महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ सहित 11 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में कार्यरत है। मई 2026 तक 13 और शाखाएं खोलने की योजना है।



