
नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज़ लिमिटेड (एनएफसीएसएफ) ने पुणे में “शुगरकेन (कंट्रोल) ऑर्डर-2026” के मसौदे पर एक उच्चस्तरीय विचार-मंथन बैठक आयोजित की, जिसमें सहकारी चीनी उद्योग से जुड़े नेताओं ने किसानों के हितों की सुरक्षा, सहकारी चीनी मिलों को मजबूत करने और देश की चीनी अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक स्थिरता देने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण सुधारों की मांग उठाई।
बैठक में एनएफसीएसएफ के अध्यक्ष हर्षवर्धन पाटिल, महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री दिलीप वालसे पाटिल, राजेश टोपे, बाळासाहेब पाटिल, एनएफसीएसएफ के निदेशक जयप्रकाश डांडेगांवकर, फेडरेशन के अन्य निदेशक तथा विभिन्न राज्यों की सहकारी चीनी मिलों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
बैठक के दौरान प्रतिभागियों ने बढ़ती उत्पादन लागत, चीनी कीमतों में उतार-चढ़ाव और सहकारी चीनी मिलों पर बढ़ते वित्तीय दबाव को लेकर चिंता व्यक्त की। चर्चा का मुख्य केंद्र गन्ना किसानों को दिए जाने वाले उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) और चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) के बीच मजबूत संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता रहा।
प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि एफआरपी में वृद्धि के अनुरूप चीनी के एमएसपी की समय-समय पर समीक्षा नहीं की गई, तो सहकारी चीनी मिलों पर नकदी संकट बढ़ता रहेगा, जिससे किसानों को समय पर गन्ना भुगतान करना मुश्किल हो सकता है।
बैठक में आरक्षित गन्ना क्षेत्र प्रणाली और चीनी मिलों के बीच न्यूनतम दूरी संबंधी प्रावधानों को जारी रखने का भी जोरदार समर्थन किया गया। प्रतिभागियों का कहना था कि इन व्यवस्थाओं ने वर्षों से गन्ना आपूर्ति में स्थिरता बनाए रखने, मिलों के बीच अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा रोकने और किसानों को शोषण से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
बैठक में एथेनॉल और बायोफ्यूल उत्पादन को चीनी मिलों की आर्थिक मजबूती के लिए महत्वपूर्ण बताया गया। प्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार से एथेनॉल परियोजनाओं के लिए ब्याज दरों में रियायत और आसान वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की मांग की।
इसके अलावा कंप्रेस्ड बायोगैस, ग्रीन एनर्जी, स्पेशियलिटी केमिकल्स और अन्य वैल्यू-एडेड उत्पादों में विविधीकरण, चीनी मिलों के आधुनिकीकरण और नई तकनीकों को अपनाने पर भी जोर दिया गया।



