
भारतीय रिजर्व बैंक ने सर्वोदय को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड का बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया है। आरबीआई ने बैंक की खराब वित्तीय स्थिति, अपर्याप्त पूंजी तथा नियामकीय मानकों के पालन में विफलता को इस कार्रवाई का मुख्य कारण बताया है।
12 मई को जारी आदेश में आरबीआई ने कहा कि मुंबई स्थित यह सहकारी बैंक पर्याप्त पूंजी और आय अर्जित करने की क्षमता से वंचित था तथा बैंकिंग विनियमन अधिनियम के कई महत्वपूर्ण प्रावधानों का पालन करने में असफल रहा। केंद्रीय बैंक के अनुसार, बैंक जमाकर्ताओं के हितों की सुरक्षा करने की स्थिति में नहीं रह गया था और यदि उसे आगे संचालन की अनुमति दी जाती, तो वह अपने मौजूदा जमाकर्ताओं की पूरी राशि लौटाने में सक्षम नहीं होता।
लाइसेंस रद्द होने के साथ ही बैंक की सभी बैंकिंग गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। अब बैंक न तो नए जमा स्वीकार कर सकेगा और न ही मौजूदा जमाओं का भुगतान कर सकेगा। आरबीआई ने महाराष्ट्र के सहकारिता आयुक्त एवं रजिस्ट्रार, सहकारी समितियों को बैंक के परिसमापन की प्रक्रिया शुरू करने और एक परिसमापक नियुक्त करने के निर्देश भी दिए हैं।
हालांकि, बैंक के अधिकांश ग्राहकों को जमा बीमा योजना के तहत राहत मिलने की उम्मीद है। आरबीआई के अनुसार, बैंक के लगभग 98.36 प्रतिशत जमाकर्ता जमा बीमा एवं ऋण गारंटी निगम (डीआईसीजीसी) योजना के तहत अपनी पूरी जमा राशि प्राप्त करने के पात्र हैं। इस योजना के तहत प्रति जमाकर्ता अधिकतम 5 लाख रुपये तक का बीमा संरक्षण उपलब्ध है। आरबीआई ने बताया कि 31 मार्च 2026 तक डीआईसीजीसी पात्र जमाकर्ताओं को 26.72 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुका है।
हाल के वर्षों में राजस्थान के सुमेरपुर मर्केंटाइल अर्बन कोऑपरेटिव बैंक, असम के महाभैरब कोऑपरेटिव अर्बन बैंक, अजंता अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक मर्यादित, इम्पीरियल अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक तथा द कारवार अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक जैसे कई बैंकों के लाइसेंस भी रद्द किए जा चुके हैं।
वित्त मंत्रालय से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 के दौरान उत्तर प्रदेश, गुजरात, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के कई शहरी सहकारी बैंक भी वित्तीय अस्थिरता के कारण बंद हुए। पिछले एक दशक में देशभर में करीब 78 शहरी सहकारी बैंकों के लाइसेंस रद्द हो चुके हैं, जिनमें महाराष्ट्र में सबसे अधिक मामले सामने आए हैं।



