
भारत और जापान ने डेयरी क्षेत्र में सहकारी आधारित कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) परियोजनाओं को बढ़ावा देने पर चर्चा शुरू की है। इस संबंध में नई दिल्ली स्थित अटल अक्षय ऊर्जा भवन में सहकारिता मंत्रालय और जापान के अर्थव्यवस्था, व्यापार एवं उद्योग मंत्रालयके बीच उच्चस्तरीय बैठक आयोजित हुई।
बैठक में डेयरी सहकारी समितियों के माध्यम से सीबीजी संयंत्र स्थापित करने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया। माना जा रहा है कि यह मॉडल ग्रामीण भारत को आर्थिक और पर्यावरणीय दोनों प्रकार के लाभ प्रदान करेगा। यह पहल भारत सरकार के सहकारिता आधारित विकास और स्वच्छ ऊर्जा विस्तार के दृष्टिकोण के अनुरूप है।
सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीष भुटानी ने देशभर में सहकारी संस्थाओं को मजबूत बनाने के लिए मंत्रालय द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी दी। उन्होंने डेयरी क्षेत्र में सतत विकास और परिपत्र अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में बायोगैस संयंत्रों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
अधिकारियों के अनुसार, डेयरी आधारित सीबीजी संयंत्र पशु अपशिष्ट को स्वच्छ ईंधन और जैविक खाद में परिवर्तित कर सकते हैं, जिससे किसानों को अतिरिक्त और स्थायी आय का स्रोत मिलेगा। इसके साथ ही पर्यावरण प्रदूषण में कमी, बेहतर अपशिष्ट प्रबंधन और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता संबंधी समस्याओं के समाधान में भी मदद मिलेगी।
डॉ. भुटानी ने कहा कि सहकारी ढांचा ऐसे परियोजनाओं को बड़े स्तर पर लागू करने के लिए प्रभावी माध्यम है, क्योंकि इसकी ग्रामीण स्तर पर मजबूत पहुंच और दुग्ध उत्पादकों से सीधा जुड़ाव है। जापान के साथ प्रस्तावित सहयोग से नवीकरणीय ऊर्जा और वेस्ट-टू-वेल्थ प्रणाली में तकनीकी विशेषज्ञता और वैश्विक अनुभव मिलने की उम्मीद है।
जापानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ताकेहिको मात्सुओ ने किया। बैठक में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने सतत डेयरी अवसंरचना और स्वच्छ ऊर्जा समाधान के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की।
बैठक में सहकारिता मंत्रालय के संयुक्त सचिव रमन कुमार, एस. राजीव तथा राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड और सहकारिता मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
इन चर्चाओं को “सहकार से समृद्धि” दृष्टि के तहत सहकारी विकास, नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रामीण सतत विकास और परिपत्र अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।



