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एनसीडीसी: नए अध्यादेशों के तहत “एग्रो इको सिस्टम” को बढ़ावा

एनसीडीसी ने पिछले सप्ताह “नए अध्यादेश: सहकारिता के लिए नए अवसर” विषय पर एक राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया, जिसमें कई शीर्ष स्तर के सहकारी नेता और केंद्रीय कृषि सचिव संजय अग्रवाल सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

विभिन्न राज्यों से 900 से अधिक लोगों ने वेबिनार में शामिल होने के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था। इस मौके पर लगभग 250 लोग ज़ूम के माध्यम से जुड़े थे और कई ‘यूट्यूब’ पर लाइव देख रहे थे।

वेबिनार में अन्य विषयों के अलावा, सहकारी समितियों की भंडारण क्षमता और कृषि क्षेत्र में निजी पूंजी को बढ़ाने के मुद्दे पर चर्चा की गई।

नए अध्यादेशों पर वेबिनार के आयोजन की रूपरेखा एनसीडीसी के एमडी सुदीप नायक ने खींची थी, जिन्होंने अपनी प्रारंभिक टिप्पणियों में वेबिनार के उद्देश्य से प्रतिभागियों को अवगत कराया। “इन अध्यादेशों के माध्यम से सहकारी समितियां, विशेष रूप से पैक्स, अपने आप को मजबूत बना सकती हैं। वे नई योजनाओं और नीतियों का लाभ उठा सकती हैं”, नायक ने कहा।

इस मौके पर तीन अध्यादेशों, आवश्यक वस्तु (संशोधन) अध्यादेश, 2020; कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अध्यादेश, 2020 और मूल्‍य आश्‍वासन पर किसान समझौता (अधिकार प्रदान करना और सुरक्षा) और कृषि सेवा अध्‍यादेश, 2020 पर विस्तार से चर्चा हुई।

केंद्रीय कृषि सचिव संजय अग्रवाल और सचिव (खाद्य और पीडीएस) सुधांशु पांडे द्वारा क्रमशः मुख्य सम्बोधन और विशेष सम्बोधन दिया गया। अन्य वक्ताओं में ए ल चुआंगो, मुख्य सचिव, मिजोरम; डॉ सौरभ गर्ग, प्रमुख सचिव, ओडिशा; एन सरवण कुमार, सचिव, बिहार; नेफस्कॉब के अध्यक्ष दिलीपभाई संघानी, रमेश वैद्य, अध्यक्ष, सहकार भारती; एन सत्यनारायण-मुख्य कार्यकारी, एनसीयूआई समेत अन्य शामिल थे।

कृषि मंत्रालय के सचिव संजय अग्रवाल ने अपने मुख्य भाषण में कृषि में सहकारिता की भूमिका की प्रशंसा की और कहा, “हमारे देश में 95 हजार से अधिक पैक्स हैं, जिनमें से 45 हजार आर्थिक रूप से सुदृढ़ और सुप्रबंधित हैं। तीन अध्यादेशों के आने से, वे स्वयं को मजबूत करने और किसानों के लाभ के लिए काम कर सकते हैं, जो 2022 तक उनकी आय को दोगुना करने में सहायक होंगे”, उन्होंने कहा।

उन्होंने कृषि क्षेत्र में निजी पूंजी बढ़ाने पर जोर दिया जो बहुत कम है। उन्होंने अध्यादेशों के तहत एक स्वतंत्र और प्रभावोत्पादक ‘एग्री इको सिस्टम बनाने पर एक प्रस्तुति भी दी।

अग्रवाल ने सरकार की कई योजनाओं पर जोर दिया, जिसमें “एग्री इंफ्रा फंड”, “10 हजार एफपीओ के लिए योजना”, “डिजिटल और स्मार्ट कृषि” और अन्य शामिल हैं। पैक्स वेयरहाउस, पैक हाउस, एसेईंग यूनिट, कोल्ड चेन, मृदा परीक्षण लैब और अन्य की स्थापना करके एग्री इंफ्रा फंड का लाभ उठा सकती हैं। मंत्रालय द्वारा उठाए गए कदम उत्साहजनक परिणाम दिखा रहे हैं”, उन्होंने आगे कहा।

खाद्य और पीडीएस के सचिव- सुधांशु पांडे ने अपनी टिप्पणी में कहा, “भारत में वेयरहाउसिंग क्षेत्र पूरी तरह से उपेक्षित है और यह क्षेत्र प्राथमिकता में नहीं है। इसके अलावा, कुल कृषि भंडारण क्षमता का लगभग 70 प्रतिशत सार्वजनिक क्षेत्र में मौजूद है और इस क्षेत्र में निजी खिलाड़ियों का योगदान बहुत सीमित है। इस संबंध में, एनसीडीसी गोदामों के निर्माण के लिए को-ऑप्स को प्रोत्साहित करने में एक बड़ी भूमिका निभा सकती है”, उन्होंने रेखांकित किया।

इसके अलावा, नैफ़्सकॉब के चेयरमैन दिलीप संघानी ने सरकार द्वारा शुरू की गई को-ऑप्स स्कीम में संशोधन का आह्वान किया है।गोदामों के निर्माण के लिए पैक्स के अनुदान में वृद्धि की जानी चाहिए। हालांकि, उन्होंने कृषि क्षेत्र के विकास की योजना की घोषणा करने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी के प्रयासों की प्रशंसा की।

सहकार भारती के अध्यक्ष, रमेश वैद्य ने कहा कि योजनाएं अच्छी हैं लेकिन जमीनी स्तर पर कोई उचित कार्यान्वयन नहीं है। हमारे देश में एफपीओ को पैक्स के समानांतर संगठन नहीं बनाना चाहिए बल्कि उन्हें पैक्स के साथ तालमेल रखना चाहिए। एनसीयूआई के मुख्य कार्यकारी एन सत्यनारायण ने एनसीयूआई की भूमिका के बारे में बताया और कहा कि ये तीनों अध्यादेश किसानों की आय को दोगुना करने में मदद करेंगे।

इस अवसर पर, मिजोरम के मुख्य सचिव – एल चुआंगो ने कहा कि कृषि और सहकारी आंदोलन के संदर्भ में उनका राज्य बहुत कमजोर है। अब इन नए अध्यादेशों से देश को खाद्यान्न के भंडारण, प्रसंस्करण और कृषि उपज के निर्यात के संदर्भ में बड़ा उछाल देखने को मिलेगा। सरवण कुमार, सचिव, बिहार ने कहा कि सभी तीन अध्यादेश सहकारी समितियों और पैक्स को प्राथमिकता देने पर केंद्रित हैं। इससे किसानों को सीधा फायदा होगा।

वेबिनार में प्रश्नोत्तर सत्र भी था। कार्यक्रम की अध्यक्षता जे पी नंदिता गुप्त- सचिव, डीएफपीडी ने की। एनसीडीसी के मुख्य निदेशक प्रसाद ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा।

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