
सेंट्रल रजिस्ट्रार ऑफ कोऑपरेटिव सोसायटी ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ऑडिटरों का संशोधित पैनल अधिसूचित कर दिया है। नए आदेश के साथ वर्ष 2023, 2024 और 2025 में जारी सभी पुराने ऑडिटर पैनल निरस्त हो गए हैं। यह संशोधित व्यवस्था बहु-राज्यीय सहकारी समितियों (एमएससीएस) तथा सहकारी बैंकों के वैधानिक और समवर्ती ऑडिट के लिए लागू होगी।
नई गाइडलाइन के अनुसार, बहु-राज्यीय सहकारी बैंकों का वैधानिक ऑडिट पहले की तरह भारतीय रिजर्व बैंक के पैनल में शामिल ऑडिटरों द्वारा ही किया जाएगा, ताकि बैंकिंग नियामकीय मानकों के अनुरूप निगरानी सुनिश्चित की जा सके।
बैंकों को छोड़कर अन्य बहु-राज्यीय सहकारी समितियों के लिए 9,248 चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्मों का समेकित पैनल अधिसूचित किया गया है, जबकि सभी एमएससीएस, जिनमें सहकारी बैंक भी शामिल हैं, के समवर्ती ऑडिट के लिए 33,375 फर्मों का बड़ा पैनल तैयार किया गया है।
इस आदेश के तहत सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में से एक ऑडिटर चयन में भौगोलिक प्रतिबंधों में ढील देना है। पहले समितियों को अपने मुख्यालय वाले जिले से ही ऑडिटर नियुक्त करना अनिवार्य था। नई व्यवस्था के तहत अब समितियां अपने मुख्यालय वाले राज्य में कहीं से भी ऑडिटर नियुक्त कर सकेंगी।
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए पहले से नियुक्त ऑडिटर वैध बने रहेंगे, भले ही उनका नाम नए पैनल में शामिल न हो, बशर्ते वे पूर्व अनुमोदित पैनल का हिस्सा रहे हों। साथ ही, नया पैनल अगले संशोधित पैनल जारी होने तक वित्त वर्ष 2026-27 में भी लागू रहेगा।
जिन ऑडिटरों का संबंधित समिति या उसकी सहायक इकाइयों में किसी प्रकार का वित्तीय हित, ऑडिट के अलावा व्यावसायिक संबंध, शेयरधारिता, बकाया ऋण या रोजगार संबंध होगा, वे नियुक्ति के लिए अयोग्य माने जाएंगे। यह प्रतिबंध बहु-राज्यीय सहकारी समितियां (संशोधन) अधिनियम, 2023 में परिभाषित रिश्तेदारों पर भी लागू होंगे।
इसके अलावा, पिछले दस वर्षों में धोखाधड़ी से जुड़े किसी अपराध में दोषी ठहराए गए ऑडिटर भी नियुक्ति के पात्र नहीं होंगे।
डिजिटल अनुपालन को बढ़ावा देते हुए सभी बहु-राज्यीय सहकारी समितियों को अब ऑडिटर नियुक्ति की जानकारी एक महीने के भीतर सीआरसीएस पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य किया गया है। इससे पारदर्शिता और नियामकीय निगरानी को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।



