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आदर्श क्रेडिट कोऑपरेटिव के भुगतान के लिए पोर्टल जल्द आने की संभावना: सूत्र

केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय आदर्श क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी के निवेशकों को उनका पैसा वापस दिलाने के लिए ऑनलाइन पोर्टल तैयार करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया भारत के सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों और निगरानी में चल रही है।

सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित पोर्टल सहारा समूह रिफंड प्रक्रिया की तर्ज पर काम करेगा, जहां निवेशक डिजिटल माध्यम से अपने दावे दर्ज कर सकेंगे।

बताया जा रहा है कि न्यायालय द्वारा नियुक्त परिसमापक (लिक्विडेटर) सोसाइटी की कुर्क संपत्तियों की बिक्री कर निवेशकों के दावों का निपटान इसी पोर्टल के माध्यम से करेगा, ताकि भुगतान प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से पूरी हो सके।

जानकारी के अनुसार, शुरुआती चरण में प्रत्येक निवेशक को 50 हजार रुपये तक का भुगतान शुरू करने की योजना पर काम किया जा रहा है। यदि संपत्तियों की बिक्री और संबंधित कानूनी प्रक्रियाएं तय समयसीमा में पूरी हो जाती हैं, तो वर्ष 2026 के दौरान भुगतान शुरू होने की संभावना है।

इस घटनाक्रम से देशभर के लाखों निवेशकों में उम्मीद जगी है, जो वर्षों से अपने पैसे की वापसी का इंतजार कर रहे हैं। निवेशकों और अन्य हितधारकों ने मंत्रालय, परिसमापक और संबंधित एजेंसियों से प्रक्रिया में तेजी लाने तथा पारदर्शी तरीके से जल्द राहत सुनिश्चित करने की मांग की है।

आदर्श क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी का मामला हाल के वर्षों में देश के सबसे बड़े सहकारी वित्तीय घोटालों में माना जाता है। सोसाइटी ने विभिन्न जमा योजनाओं के जरिए कई राज्यों से हजारों करोड़ रुपये जुटाए थे और निवेशकों को ऊंचे रिटर्न का वादा किया था।

अनुमान है कि 20 लाख से अधिक निवेशक, जिनमें बड़ी संख्या ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के छोटे बचतकर्ताओं की थी, भुगतान रुकने से प्रभावित हुए।

इस संकट का असर आर्थिक के साथ-साथ सामाजिक स्तर पर भी गहरा पड़ा। कई निवेशकों ने अपनी जीवनभर की बचत, सेवानिवृत्ति निधि या उधार लेकर निवेश किया था, जिसके कारण व्यापक आर्थिक परेशानी पैदा हुई।

जांच एजेंसियों ने प्रमोटरों से जुड़ी कई संपत्तियां कुर्क कीं तथा धन की वसूली के लिए कानूनी कार्रवाई शुरू की। हालांकि, निवेशों के जटिल नेटवर्क, कथित फंड डायवर्जन और लंबी कानूनी प्रक्रिया के कारण समाधान में देरी हुई।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रस्तावित ऑनलाइन रिफंड पोर्टल निवेशकों का भरोसा बहाल करने और लाखों प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

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