
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और उसके वैश्विक उर्वरक आपूर्ति शृंखलाओं पर संभावित प्रभाव के बीच इफको ने देशभर में “नैनो उर्वरक प्रचार महा अभियान” की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य किसानों के बीच नैनो उर्वरकों को एक टिकाऊ, किफायती और आत्मनिर्भर विकल्प के रूप में बढ़ावा देना है।
प्राकृतिक गैस और अन्य महत्वपूर्ण कच्चे माल की आपूर्ति में व्यवधान के कारण पारंपरिक उर्वरकों की उपलब्धता और कीमतों को लेकर अनिश्चितता बढ़ रही है। ऐसे समय में इफको अपने स्वदेशी नैनो उर्वरकों को एक रणनीतिक समाधान के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जिससे आयात पर निर्भरता कम की जा सके।
इफको के अध्यक्ष दिलीप संघानी ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियां कृषि क्षेत्र में नवाचार और स्वदेशी समाधानों की ओर निर्णायक कदम उठाने की मांग करती हैं। उन्होंने कहा, “पश्चिम एशिया संकट के कारण उत्पन्न अनिश्चितताओं के बीच भारतीय कृषि के लिए आयातित उर्वरकों पर निर्भरता कम करना अत्यंत आवश्यक है। भारत में विकसित नैनो उर्वरक किसानों के लिए विश्वसनीय, प्रभावी और टिकाऊ विकल्प हैं।”
इफको के प्रबंध निदेशक के. जे. पटेल ने भी नैनो उर्वरकों के तकनीकी और आर्थिक लाभों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “नैनो उर्वरक खेती का भविष्य हैं। ये पोषक तत्वों की दक्षता बढ़ाते हैं, लागत कम करते हैं और पर्यावरणीय प्रभाव को कम करते हैं। वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं पर दबाव के इस दौर में ‘मेड इन इंडिया’ समाधान कृषि क्षेत्र को स्थिरता प्रदान कर सकते हैं।”
यह महा अभियान देशभर में जागरूकता कार्यक्रमों, फील्ड प्रदर्शन और सहकारी नेटवर्क के माध्यम से किसानों तक पहुंचेगा। इसके तहत नैनो यूरिया और नैनो डीएपी जैसे उत्पादों को बढ़ावा दिया जाएगा, जो फसल उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ पारंपरिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग को कम करने में सहायक हैं।
इफको की यह पहल “आत्मनिर्भर भारत” और “सहकार से समृद्धि” के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप है। संगठन ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व और मार्गदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि सहकारिता क्षेत्र को नई गति मिली है।
इफको के अनुसार, नैनो उर्वरक केवल एक वैकल्पिक इनपुट नहीं, बल्कि आधुनिक, किफायती और पर्यावरण अनुकूल कृषि की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम हैं। यह पहल न केवल आयात निर्भरता को कम करेगी, बल्कि भारत को उर्वरक नवाचार के क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी बनाने की क्षमता भी रखती है।
संगठन ने किसानों से इस स्वदेशी अभियान को अपनाने और एक मजबूत, आत्मनिर्भर कृषि प्रणाली के निर्माण में सक्रिय भागीदारी करने का आह्वान किया है। यह महा अभियान वैश्विक संकट के बीच एक त्वरित प्रतिक्रिया होने के साथ-साथ भारत के कृषि भविष्य को सुरक्षित करने की दीर्घकालिक रणनीति भी माना जा रहा है।



