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केंद्रीय बजट 2026-27: सहकारी क्षेत्र के लिए प्रमुख बिंदु

केंद्रीय बजट 2026 में सहकारी क्षेत्र को बड़ी राहत देते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्राथमिक सहकारी समितियों, इंटर-कोऑपरेटिव सोसायटिज तथा राष्ट्रीय सहकारी संघों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से कर में राहत प्रदान की है।

इस घोषणा से सहकारी संस्थाओं की वित्तीय स्थिरता में सुधार, तरलता बढ़ाने तथा सहकारी ढांचे में दोहरे कराधान की समस्या को दूर करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

प्रस्तावों के तहत सरकार ने प्राथमिक सहकारी समितियों को उपलब्ध आयकर कटौती के मौजूदा प्रावधान का विस्तार किया है। अब तक यह कर लाभ उन सहकारी समितियों को मिलता था, जो अपने सदस्यों द्वारा उत्पादित दूध, तिलहन, फल या सब्जियों की आपूर्ति करती थीं। बजट में इस कटौती के दायरे को बढ़ाते हुए अब इसमें सदस्यों द्वारा उत्पादित पशु आहार और कपास बीज की आपूर्ति करने वाली प्राथमिक सहकारी समितियों को भी शामिल करने का प्रस्ताव किया गया है।

यह कर कटौती तब लागू होगी, जब ऐसी आपूर्ति संघीय सहकारी समितियों, सरकारी संगठनों अथवा अन्य पात्र संस्थाओं को की जाएगी, जिससे कृषि से जुड़े सहायक क्षेत्रों में कार्यरत सहकारी संस्थाओं को अतिरिक्त समर्थन मिलेगा।

अधिशेष वितरण (सरप्लस वितरण) के कराधान से जुड़ी चिंताओं को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने नए कर ढांचे के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण सुधार का प्रस्ताव किया है। इसके अनुसार, अब एक सहकारी समिति द्वारा किसी अन्य सहकारी समिति से प्राप्त लाभांश आय को कर कटौती के रूप में मान्य किया जाएगा, बशर्ते कि वह राशि आगे सदस्यों को वितरित की जाए।

हालांकि यह कटौती पुराने कर ढांचे में उपलब्ध थी, लेकिन नए कर ढांचे में इसके अभाव के कारण दोहरे कराधान का जोखिम उत्पन्न हो रहा था, पहले सहकारी समिति के स्तर पर और फिर सदस्यों के स्तर पर। प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य कर तटस्थता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना है।

एक अन्य महत्वपूर्ण घोषणा में बजट ने अधिसूचित राष्ट्रीय सहकारी संघों को 31 जनवरी 2026 तक कंपनियों में किए गए निवेश से प्राप्त लाभांश आय पर तीन वर्षों की कर छूट प्रदान करने का प्रावधान किया है।

यह छूट केवल उसी सीमा तक उपलब्ध होगी, जितनी राशि आगे सदस्य सहकारी समितियों को वितरित की जाएगी, जिससे इसका लाभ व्यापक सहकारी नेटवर्क तक सुनिश्चित किया जा सके।

कुल मिलाकर, बजट 2026 के ये प्रस्ताव सहकारी क्षेत्र पर कर भार कम करने, सदस्य-केंद्रित अधिशेष वितरण को प्रोत्साहित करने तथा ग्रामीण विकास और समावेशी विकास में सहकारी संस्थाओं की भूमिका को और मजबूत करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

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