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बजट में सहकारिता मंत्रालय की प्रमुख भूमिका, आवंटन में भारी बढ़ोतरी

केंद्र सरकार ने केंद्रीय बजट 2026-27 में सहकारिता क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत करते हुए सहकारिता मंत्रालय के बजटीय आवंटन में उल्लेखनीय वृद्धि की है। मंत्रालय का कुल परिव्यय वर्ष 2026-27 में बढ़कर 1,744.74 करोड़ रुपये हो गया है, जो वर्ष 2025-26 में 1,186.29 करोड़ रुपये था।

कुल 1,744.74 करोड़ रुपये के आवंटन में से 47.77 करोड़ रुपये सहकारिता मंत्रालय के स्थापना व्यय के लिए निर्धारित किए गए हैं। इसमें मंत्रालय के सचिवालय के साथ-साथ इसके संलग्न एवं अधीनस्थ कार्यालयों, जैसे केंद्रीय सहकारी समितियाँ पंजीयक, सहकारी चुनाव प्राधिकरण तथा लोकपाल कार्यालय, का व्यय शामिल है।

सहकारिता क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम को दी जाने वाली 500 करोड़ रुपये की वार्षिक अनुदान सहायता वर्ष 2025-26 की तरह 2026-27 में भी जारी रखी गई है। इस सहायता का उद्देश्य सहकारी संस्थाओं, विशेष रूप से सहकारी चीनी मिलों, को सुदृढ़ करना है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहकारी निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने वर्ष 2026-27 में राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (एनसीईएल) को 450 करोड़ रुपये का आवंटन किया है, जिससे वैश्विक बाजारों तक सहकारी संस्थाओं की पहुंच को सशक्त बनाया जा सकेगा।

डिजिटल परिवर्तन को प्राथमिकता देते हुए वर्ष 2026-27 में प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) के कम्प्यूटरीकरण के लिए 364 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस योजना के अंतर्गत देश भर की 67,930 से अधिक कार्यरत पैक्स को कवर किया जाएगा।

इसके अतिरिक्त, कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंकों (एआरडीबी) तथा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सहकारी समितियों के पंजीयकों के कार्यालयों को सशक्त बनाने के लिए आईटी आधारित हस्तक्षेप योजनाओं के अंतर्गत अतिरिक्त धनराशि का प्रावधान किया गया है, जिससे कार्यक्षमता, पारदर्शिता और जवाबदेही में सुधार हो सके।

सहकारी शिक्षा और क्षमता निर्माण को भी विशेष बल दिया गया है। इसके तहत 300 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जिसमें त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय (टीएसयू) में पूंजीगत परिसंपत्तियों के सृजन हेतु अनुदान शामिल है।

इसके अलावा, प्रमुख प्रशिक्षण संस्थानों को वेतन मद के तहत कुल 56.96 करोड़ रुपये की अनुदान सहायता दी गई है। इसमें राष्ट्रीय सहकारी प्रशिक्षण परिषद (एनसीसीटी) के लिए 46.96 करोड़ रुपये तथा वैकुंठलाल मेहता राष्ट्रीय सहकारी प्रबंधन संस्थान (वैमनिकॉम) के लिए 10 करोड़ रुपये शामिल हैं। एनसीसीटी के आवंटन में 4.96 करोड़ रुपये की वृद्धि की गई है।

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