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इफको साहित्य सम्मान: संघानी ने सहकारिता के सांस्कृतिक मिशन को किया रेखांकित

भारतीय किसान उर्वरक सहकारी लिमिटेड (इफको) ने कृषि के साथ-साथ भारत के बौद्धिक और सांस्कृतिक जीवन को समृद्ध करने के उद्देश्य से मंगलवार को इफको साहित्य सम्मान 2025 का आयोजन किया। इस अवसर पर प्रख्यात हिंदी लेखिका मैत्रेयी पुष्पा और युवा लेखिका अंकिता जैन को उनके उल्लेखनीय साहित्यिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

समारोह को संबोधित करते हुए इफको के अध्यक्ष दिलीप संघानी ने कहा कि इफको की भूमिका केवल उर्वरक उत्पादन तक सीमित नहीं है। “इफको कृषि के प्रति समर्पित होने के साथ-साथ समाज की वैचारिक और सांस्कृतिक समृद्धि के लिए भी प्रतिबद्ध है,” उन्होंने कहा।

उन्होंने ‘सहकार से समृद्धि’ के मंत्र पर जोर देते हुए बताया कि इफको ने हमेशा ग्रामीण जीवन और सामाजिक यथार्थ को प्रतिबिंबित करने वाले साहित्य और रचनात्मक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित किया है।

संघानी ने इफको की पांच दशक से अधिक की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह देश की सबसे बड़ी सहकारी संस्था के रूप में करोड़ों किसानों को किफायती दरों पर गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान उपलब्ध करा रही है। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत और सतत कृषि के लक्ष्यों से जोड़ते हुए स्वदेशी तकनीक से विकसित विश्व की पहली नैनो उर्वरक तकनीक को इफको की ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।

उन्होंने कहा कि नैनो यूरिया, नैनो डीएपी, नैनो जिंक और नैनो कॉपर जैसे उत्पाद किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी, जल और वायु प्रदूषण को भी कम करते हैं।

इफको साहित्य सम्मान 2025 प्रख्यात हिंदी उपन्यासकार और कथाकार मैत्रेयी पुष्पा को ग्रामीण समाज, महिला अनुभवों और सामाजिक परिवर्तन पर केंद्रित उनके विशिष्ट साहित्यिक योगदान के लिए प्रदान किया गया। सम्मान स्वीकार करते हुए मैत्रेयी पुष्पा ने कहा कि किसानों और गांवों से जुड़े संस्थान से मिला यह सम्मान उनके लिए विशेष महत्व रखता है।

इफको युवा साहित्य सम्मान 2025 लेखिका अंकिता जैन को उनकी कृति ओह रे! किसान के लिए प्रदान किया गया, जो कृषि जीवन की वास्तविकताओं को सशक्त रूप में प्रस्तुत करती है। अंकिता जैन ने कहा कि यह सम्मान युवा लेखकों को ग्रामीण मुद्दों से जुड़ने की प्रेरणा देता है। उल्लेखनीय है कि उनकी पहली पुस्तक ऐसी वैसी औरत पाठकों में काफी लोकप्रिय रही है और वे किसान उत्पादक संगठनों के माध्यम से आदिवासी महिलाओं के साथ भी कार्य कर रही हैं।

वर्ष 2011 में स्थापित इफको साहित्य सम्मान में 11 लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जाती है, जबकि युवा साहित्य सम्मान के अंतर्गत 2.5 लाख रुपये, प्रशस्ति-पत्र और स्मृति-चिह्न दिए जाते हैं। ये पुरस्कार सहकारिता की भावना के तहत कृषि, संस्कृति और साहित्य के बीच सेतु स्थापित करने की इफको की विशिष्ट पहल को दर्शाते हैं।

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