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मलकापुर यूसीबी और शुश्रुति सौहार्द सहकारी बैंक का लाइसेंस रद्द

भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को कर्नाटक स्थित शुश्रुति सौहार्द सहकारी बैंक नियामिता और महाराष्ट्र स्थित मलकापुर अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड का लाइसेंस रद्द कर दिया।

शुश्रुति सौहार्द सहकारी बैंक नियामिता द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, 91.92% जमाकर्ता डीआईसीजीसी से उनकी पूरी जमाराशि प्राप्त करने के हकदार हैं। वहीं मलकापुर अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, 97.60% जमाकर्ता डीआईसीजीसी से उनकी पूरी जमा राशि प्राप्त करने के हकदार हैं, आरबीआई की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक।

प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, “भारतीय रिज़र्व बैंक ने “शुश्रुति सौहार्द सहकारा बैंक नियमिता, बेंगलुरु” का लाइसेंस रद्द कर दिया है। परिणामस्वरूप, बैंक 5 जुलाई 2023 को कारोबार की समाप्ति के पश्‍चात बैंकिंग कारोबार नहीं कर सकता है। सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार, बेंगलुरु से भी अनुरोध किया गया है कि वे बैंक का समापन करने और बैंक के लिए एक परिसमापक नियुक्त करने का आदेश जारी करें।”

भारतीय रिज़र्व बैंक ने निम्न कारणों से इन बैंकों का लाइसेंस रद्द किया है। बैंकों के पास पर्याप्त पूंजी और आय की संभावनाएं नहीं हैं। इस प्रकार, यह बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 11 (1) और धारा 22 (3) (डी) के प्रावधानों का अनुपालन नहीं करता है।

यह बैंक, बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धाराओं 22 (3) (ए), 22 (3) (बी), 22 (3) (सी), 22 (3) (डी) और 22 (3) (ई) की अपेक्षाओं के अनुपालन में विफल रहे हैं। इन बैंकों का बने रहना उसके जमाकर्ताओं के हितों के प्रतिकूल है।

यह बैंक अपनी वर्तमान वित्तीय स्थिति के साथ अपने वर्तमान जमाकर्ताओं को पूर्ण भुगतान करने में असमर्थ होंगे। यदि इन बैंकों को अपने बैंकिंग व्यवसाय को जारी रखने की अनुमति दी जाती है तो जनहित प्रतिकूल रूप से प्रभावित होगा।

लाइसेंस रद्द होने के परिणामस्वरूप, शुश्रुति सौहार्द सहकारा बैंक नियमिता, बेंगलुरु को तत्काल प्रभाव से बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 5 (बी) में परिभाषित ‘बैंकिंग’ व्यवसाय, जिसमें अन्य बातों के साथ-साथ जमाराशियों को स्वीकार करने और जमाराशियों की चुकौती करना शामिल हैं, करने से प्रतिबंधित किया गया है।

परिसमापन पर, प्रत्येक जमाकर्ता, डीआईसीजीसी अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के अंतर्गत, नि‍क्षेप बीमा और प्रत्यय गारंटी नि‍गम (डीआईसीजीसी) से 5,00,000/- (पांच लाख रुपये मात्र) की मौद्रिक सीमा तक अपने जमाराशि के संबंध में जमा बीमा दावा राशि प्राप्त करने का हकदार होगा, विज्ञप्ति के अनुसार।

 

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