
केरल उच्च न्यायालय ने शहरी सहकारी बैंकों पर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के अधिकारों के दायरे को स्पष्ट करते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि आरबीआई शहरी सहकारी बैंक के निदेशक मंडल (बोर्ड) को पूर्व सुनवाई का अवसर दिए बिना भंग कर सकता है, लेकिन ऐसा करने से पहले बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 36एएए के तहत केरल सरकार से परामर्श करना अनिवार्य है।
यह मामला इरिंजलाकुडा टाउन को-ऑपरेटिव बैंक के पूर्व अध्यक्ष एम.पी. जैक्सन द्वारा दायर याचिका से जुड़ा था। उन्होंने अक्टूबर 2025 में आरबीआई द्वारा बैंक के निर्वाचित निदेशक मंडल को भंग कर धारा 36एएए के तहत प्रशासक नियुक्त करने के आदेश को चुनौती दी थी।
आरबीआई ने बैंक के निरीक्षण में बैंक के कामकाज में कई अनियमितताएं पाए जाने तथा बैंक को ऑल इन्क्लूसिव डायरेक्शंस (एआईडी) के तहत रखने के बाद यह कार्रवाई की थी।
न्यायमूर्ति एम.ए. अब्दुल हकीम ने अपने फैसले में कहा कि बैंकिंग विनियमन अधिनियम की धारा 36एएए के तहत आरबीआई के लिए बोर्ड को भंग करने से पहले कारण बताओ नोटिस जारी करना या व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य नहीं है। अदालत ने कहा कि संसद ने धारा 36एए में इस प्रकार का प्रावधान किया है, जबकि धारा 36एएए में इसे जानबूझकर शामिल नहीं किया। इसलिए इस प्रावधान में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों को नहीं पढ़ा जा सकता।
हालांकि, न्यायालय ने यह भी माना कि आरबीआई ने एक अनिवार्य वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया। अदालत के अनुसार, आरबीआई ने केरल सरकार के बजाय केवल सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार से परामर्श किया, जबकि कानून स्पष्ट रूप से राज्य सरकार से परामर्श की अपेक्षा करता है। इसलिए रजिस्ट्रार से किया गया परामर्श राज्य सरकार से परामर्श का वैधानिक विकल्प नहीं माना जा सकता।
अदालत ने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में इस आधार पर याचिकाकर्ता को राहत मिल सकती थी। लेकिन इस मामले में प्रशासक लगभग नौ महीने से बैंक का संचालन कर रहा है और उसका एक वर्ष का कार्यकाल 6 अक्टूबर 2026 को समाप्त होना है। ऐसे में इस चरण पर निर्वाचित निदेशक मंडल को पुनः बहाल करना न तो जनहित में होगा और न ही बैंक तथा उसके जमाकर्ताओं के हित में।
इन्हीं कारणों से उच्च न्यायालय ने याचिका खारिज कर दी। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया कि यदि आरबीआई 6 अक्टूबर 2026 के बाद भी प्रशासक को बनाए रखने का निर्णय लेता है, तो बैंकिंग विनियमन अधिनियम की धारा 36एएए के अनुसार उसे पहले केरल सरकार से परामर्श करना होगा।



