
दिल्ली रजिस्ट्रार ऑफ कोऑपरेटिव सोसायटीज (आरसीएस) कृष्ण कुमार सिंह ने सहकारी समितियों की प्रबंधन समितियों में को-ऑप्शन, चुनावों के संचालन और सदस्यता अभिलेखों के रखरखाव से संबंधित तीन महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं।
दिल्ली सहकारी समितियां अधिनियम, 2003 की धारा 42 के तहत जारी ये निर्देश दिल्ली में पंजीकृत सभी सहकारी समितियों पर लागू होंगे।
इनमें सबसे महत्वपूर्ण निर्देश सहकारी समितियों की प्रबंधन समितियों में को-ऑप्शन से संबंधित है। रजिस्ट्रार ने स्पष्ट किया है कि कई समितियों के उपविधियों (बायलॉज) में अभी भी को-ऑप्शन का प्रावधान मौजूद है, लेकिन यह व्यवस्था पूर्ववर्ती दिल्ली सहकारी समितियां अधिनियम, 1972 के तहत थी। वर्तमान दिल्ली सहकारी समितियां अधिनियम, 2003 तथा दिल्ली सहकारी समितियां नियम, 2007 में प्रबंधन समितियों में को-ऑप्शन का कोई प्रावधान नहीं है।
आरसीएस ने सभी समितियों को अपने उपविधियों की समीक्षा कर उन्हें वर्तमान अधिनियम और नियमों के अनुरूप संशोधित करने का निर्देश दिया है। संशोधित उपविधियों के पंजीकरण के लिए प्रस्ताव 90 दिनों के भीतर रजिस्ट्रार कार्यालय में प्रस्तुत करने होंगे।
रजिस्ट्रार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अधिनियम, नियमों और जारी निर्देशों के विपरीत किया गया कोई भी को-ऑप्शन पूर्णतः अवैध और अमान्य माना जाएगा।
चुनाव संबंधी दूसरे निर्देश में चुनावी विवादों और मुकदमेबाजी को कम करने के लिए पूर्व-सत्यापन प्रक्रिया लागू की गई है। अब सभी सहकारी समितियों को अपनी निर्वाचित प्रबंधन समिति का कार्यकाल समाप्त होने से दो माह पूर्व आवश्यक दस्तावेजों सहित एक घोषणा-पत्र रजिस्ट्रार कार्यालय में जमा करना होगा।
रजिस्ट्रार कार्यालय इन दस्तावेजों की जांच कर 15 दिनों के भीतर चुनाव कराने की अनुमति प्रदान करेगा। निर्देश में कहा गया है कि यदि कोई समिति अपने कार्यकाल की समाप्ति से पहले चुनाव प्रक्रिया शुरू नहीं करती है, तो अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार समिति के कार्यों के संचालन और चुनाव संपन्न कराने के लिए प्रशासक नियुक्त किया जा सकता है।
यह निर्देश मतदाता सूची, बकायादारों की सूची, नामांकन पत्रों की जांच तथा लंबी मुकदमेबाजी के कारण कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद समितियों के बने रहने जैसे विवादों को रोकने के उद्देश्य से जारी किया गया है।
तीसरे निर्देश में सदस्यता अभिलेखों के रखरखाव पर विशेष जोर दिया गया है। आरसीएस ने पाया है कि कई समितियां दिल्ली सहकारी समितियां नियम, 2007 के नियम 28 के अनुसार सदस्य रजिस्टरों का रखरखाव नहीं कर रही हैं। इसलिए सभी समितियों को पूर्ण सदस्यता अभिलेख बनाए रखने तथा 30 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।
रजिस्ट्रार ने चेतावनी दी है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत न करना धारा 42 के तहत जारी निर्देशों की अवहेलना माना जाएगा। ऐसी स्थिति में संबंधित प्रबंधन समिति के विरुद्ध कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें दिल्ली सहकारी समितियां अधिनियम, 2003 की धारा 37 के तहत समिति को भंग करने की कार्यवाही भी शामिल है।



