
सेंट्रल रजिस्ट्रार ऑफ कोऑपरेटिव सोसायटीज (सीआरसीएस) कार्यालय ने को-ऑपरेटिव एजुकेशन फंड में अनिवार्य अंशदान जमा नहीं करने वाली बहु-राज्यीय सहकारी समितियों (एमएससीएस) के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। वित्तीय वर्ष 2022-23, 2023-24 और 2024-25 के लिए लंबित अंशदान को लेकर संबंधित समितियों को नोटिस जारी किए गए हैं।
सहकारिता मंत्रालय द्वारा जारी नोटिसों में लाभ अर्जित करने वाली बहु-राज्यीय सहकारी समितियों को निर्देश दिया गया है कि वे बहु-राज्यीय सहकारी समितियां (संशोधन) अधिनियम, 2023 की धारा 63(1)(बी) के तहत अपने वार्षिक शुद्ध लाभ का एक प्रतिशत सहकारी शिक्षा निधि में तत्काल जमा करें।
सीआरसीएस कार्यालय के अनुसार, सीआरसीएस पोर्टल पर जमा वार्षिक प्रतिवेदनों की जांच के दौरान पाया गया कि कई बहु-राज्यीय सहकारी समितियों ने संबंधित वर्षों में लाभ अर्जित किया, लेकिन उन्होंने सहकारी शिक्षा निधि में निर्धारित अंशदान जमा नहीं किया। इसके बाद ऐसी समितियों को शीघ्र अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
यह कार्रवाई वर्ष 2023 में बहु-राज्यीय सहकारी समितियां अधिनियम में किए गए संशोधनों के बाद विशेष महत्व रखती है। संशोधन से पहले सहकारी शिक्षा संबंधी अंशदान का प्रबंधन और संचालन राष्ट्रीय सहकारी संघ (एनसीयूआई) द्वारा किया जाता था।
हालांकि, संशोधित कानून के तहत सहकारी शिक्षा निधि के रखरखाव और संचालन की जिम्मेदारी सहकारिता मंत्रालय को सौंप दी गई है। साथ ही यह अनिवार्य किया गया है कि लाभ अर्जित करने वाली प्रत्येक बहु-राज्यीय सहकारी समिति अपने वार्षिक शुद्ध लाभ का एक प्रतिशत इस निधि में जमा करेगी।
इस निधि का उद्देश्य सहकारी क्षेत्र में शिक्षा, प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण तथा व्यावसायिक विकास को बढ़ावा देना है, ताकि सहकारी संस्थाओं के सुशासन और संस्थागत दक्षता को मजबूत किया जा सके।
जारी सूची के अनुसार, नोटिस प्राप्त करने वाली संस्थाओं में राष्ट्रीय श्रम एवं सहकारी संघ (एनएलसीएफ), नेफकॉब, बिहार राज्य सहकारी विपणन संघ (बिस्कोमान) तथा नेफ्सकॉब सहित अन्य संस्थाएं शामिल हैं।
सहकारिता मंत्रालय की यह पहल संशोधित कानून के प्रभावी अनुपालन को सुनिश्चित करने तथा सहकारी क्षेत्र में शिक्षा एवं प्रशिक्षण गतिविधियों के लिए संसाधनों को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह कदम बहु-राज्यीय सहकारी समितियों और उनके महासंघों के वैधानिक अनुपालन पर मंत्रालय की बढ़ती निगरानी को भी दर्शाता है।



