
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 में शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) के लिए वर्ष 2026-27 का व्यापक पर्यवेक्षण एजेंडा जारी किया है। इसमें डेटा की गुणवत्ता, साइबर सुरक्षा, जोखिम-आधारित पर्यवेक्षण तथा कर्मचारियों के क्षमता निर्माण पर विशेष जोर दिया गया है।
आरबीआई ने यूसीबी पर्यवेक्षण के लिए छह प्रमुख लक्ष्य निर्धारित किए हैं। इनमें टियर-3 और टियर-4 यूसीबी के लिए सुपरवाइजरी डेटा क्वालिटी इंडेक्स का विकास, चयनित बैंकों को जोखिम-आधारित पर्यवेक्षण के दायरे में लाना तथा सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) प्रणालियों की जांच और कमियों के आकलन को मजबूत करना शामिल है।
केंद्रीय बैंक ने साइबर सुरक्षा ढांचे के स्तर 2, 3 और 4 के अंतर्गत आने वाले यूसीबी के लिए साइबर मैपिंग अभ्यास संचालित करने तथा संशोधित साइबर सुरक्षा दिशानिर्देश जारी करने की भी योजना बनाई है।
आरबीआई के अनुसार, ‘मिशन सक्षम’ के तहत यूसीबी कर्मचारियों के लिए प्रत्यक्ष प्रशिक्षण कार्यक्रमों और ई-लर्निंग पाठ्यक्रमों के माध्यम से क्षमता निर्माण को और गति दी जाएगी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘उत्कर्ष 2.0’ के तहत चयनित यूसीबी के लिए केवाईसी/एएमएल पर्यवेक्षण की जोखिम-आधारित प्रणाली की व्यापक समीक्षा पूरी कर ली गई है।
संशोधित ढांचा अब यूसीबी क्षेत्र की लगभग 60 प्रतिशत जमा राशि को कवर करता है तथा केवाईसी जोखिम, धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग), आतंकवाद वित्तपोषण और उभरते क्षेत्रीय जोखिमों पर विशेष ध्यान केंद्रित करता है।
आरबीआई ने यह भी बताया कि यूसीबी के लिए जोखिम-आधारित पर्यवेक्षण ढांचे के विकास की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। संशोधित साइबर सुरक्षा दिशानिर्देशों का मसौदा भी तैयार कर लिया गया है, जिसे अंतिम रूप देने से पहले सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया जाएगा।



