
सहकारिता मंत्रालय के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) के क्षेत्रीय कार्यालय, पुणे द्वारा चीनी क्षेत्र में चक्रीय अर्थव्यवस्था (सर्कुलर इकोनॉमी) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
वैकुंठ मेहता राष्ट्रीय सहकारी प्रबंधन संस्थान (वैमनीकॉम), पुणे में आयोजित इस कार्यक्रम का विषय “बहु-राज्य सहकारी समिति के गठन के माध्यम से चीनी क्षेत्र में चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना” था।
कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय सहकारिता एवं नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने की। इस अवसर पर सहकारिता मंत्रालय के संयुक्त सचिव रमन कुमार, इंडियन पोटाश लिमिटेड के संजीव वेदप्रकाश वर्मा तथा महाराष्ट्र और कर्नाटक की सहकारी चीनी मिलों के वरिष्ठ प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में महाराष्ट्र के कोल्हापुर, सांगली और सोलापुर जिलों तथा कर्नाटक के बेलगावी जिले की लगभग 31 सहकारी चीनी मिलों के अध्यक्षों, उपाध्यक्षों, प्रबंध निदेशकों और अन्य अधिकारियों ने भाग लिया।
बैठक के दौरान इंडियन पोटाश लिमिटेड द्वारा प्रस्तावित बहु-राज्य सहकारी समिति के गठन और उसमें विभिन्न हितधारकों की भूमिका पर विस्तृत चर्चा की गई। प्रस्तावित समिति का उद्देश्य चीनी उद्योग में उपलब्ध संसाधनों और उप-उत्पादों का बेहतर उपयोग करते हुए एक एकीकृत चक्रीय अर्थव्यवस्था मॉडल विकसित करना है।
अपने संबोधन में मुरलीधर मोहोल ने कहा कि सहकारी चीनी मिलों के लिए बदलते आर्थिक और पर्यावरणीय परिदृश्य में नए अवसरों की तलाश करना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि बहु-राज्य सहकारी समिति के माध्यम से चीनी उद्योग के उप-उत्पादों को उच्च मूल्य वाले उत्पादों में परिवर्तित किया जा सकता है, जिससे मिलों की आय बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि हरित ऊर्जा और जैव-आधारित रसायनों के उपयोग को बढ़ावा देकर ईंधन की खपत कम करने तथा टिकाऊ विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।
कार्यक्रम में इंडियन पोटाश लिमिटेड की टीम ने विस्तृत प्रस्तुति देते हुए चीनी क्षेत्र की वर्तमान चुनौतियों और प्रस्तावित बहु-राज्य सहकारी समिति से होने वाले संभावित लाभों पर प्रकाश डाला।
सहकारिता मंत्रालय के संयुक्त सचिव रमन कुमार ने कहा कि सहकारिता आंदोलन में अग्रणी महाराष्ट्र इस मॉडल को सफलतापूर्वक लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। कार्यक्रम के अंत में आयोजित खुली चर्चा में सहकारी चीनी मिलों के प्रतिनिधियों की शंकाओं और सुझावों पर भी विस्तार से विचार किया गया।



