
भारत मंडपम में आयोजित इफको की 55वीं वार्षिक आम बैठक के दौरान इफको के प्रबंध निदेशक के. जे. पटेल ने पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण उत्पन्न ऊर्जा एवं उर्वरक संकट पर विस्तार से चिंता व्यक्त की।
उन्होंने बताया कि 28 फरवरी से शुरू हुए युद्ध के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने के कारण 50 हजार मीट्रिक टन सल्फर लेकर आ रहा एक जहाज अब तक फंसा हुआ है। इतना ही नहीं, अतिरिक्त 50 हजार मीट्रिक टन सल्फर लाने के लिए दूसरे जहाज की लोडिंग की कोशिश भी युद्ध की स्थिति के चलते प्रभावित हुई है।
पटेल ने कहा कि प्राकृतिक गैस उर्वरक संयंत्रों के लिए एक महत्वपूर्ण कच्चा माल है। “हम अपनी अमोनिया आवश्यकता का लगभग 60 प्रतिशत और सल्फर की जरूरत का 80 प्रतिशत खाड़ी देशों से आयात करते हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य में अवरोध ने अभूतपूर्व संकट पैदा कर दिया है,” उन्होंने कहा।
उन्होंने बताया कि इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL) के माध्यम से कच्चे माल की आपूर्ति के लिए वैश्विक निविदा जारी की गई थी, लेकिन उससे भी 50 प्रतिशत आवश्यकता पूरी नहीं हो सकी। साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति अत्यधिक महंगे दामों पर उपलब्ध कराई जा रही है।
इन परिस्थितियों में पटेल ने कहा कि नैनो उर्वरकों को अपनाना देश के लिए बड़ा वरदान साबित हो सकता है। उन्होंने प्रधानमंत्री के प्राकृतिक खेती के आह्वान का उल्लेख करते हुए कहा कि नैनो उर्वरक भारत को कृषि में रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम करने और विदेशी मुद्रा की बड़ी बचत करने का अवसर प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा कि युद्ध से पहले ही सरकार उर्वरक सब्सिडी पर लगभग दो लाख करोड़ रुपये खर्च कर रही थी और अब संघर्ष के चलते यह बोझ और बढ़ सकता है। भारत अपनी लगभग 50 प्रतिशत उर्वरक जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, ऐसे में नैनो उर्वरकों का महत्व और अधिक बढ़ जाता है।
पटेल ने इफको चेयरमैन दिलीप संघानी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जब उत्तर प्रदेश सहित कुछ राज्यों में गैर-सब्सिडी उर्वरकों की बिक्री पर रोक लगाई गई थी, जिससे नैनो उर्वरकों की बिक्री प्रभावित हुई, तब संघानी ने केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा। इसके बाद अमित शाह ने सभी मुख्यमंत्रियों को पत्र भेजकर नैनो उर्वरकों को बढ़ावा देने का आग्रह किया।
उन्होंने सहकारिता मंत्रालय को सहकारी क्षेत्र की समस्याओं के समाधान के लिए “वन स्टॉप सॉल्यूशन” बताते हुए कहा कि मंत्रालय हर संभव सहायता प्रदान करता है।
इस दौरान इफको के उपाध्यक्ष बलवीर सिंह ने धन्यवाद प्रस्ताव रखते हुए कहा कि चेयरमैन दिलीप संघानी के हस्तक्षेप से सरकार के पास लंबित सभी सब्सिडी राशि जारी कर दी गई।
उधर, केंद्र सरकार ने एक बयान में कहा कि मौजूदा संकट के बावजूद देश में उर्वरकों का पर्याप्त बफर स्टॉक उपलब्ध है। सरकार के अनुसार, इस वर्ष 390.54 लाख मीट्रिक टन की अनुमानित आवश्यकता के मुकाबले वर्तमान में 200.12 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का स्टॉक उपलब्ध है, जो सामान्य स्तर से काफी अधिक है।
सरकार ने बताया कि संकट के बाद भी घरेलू उत्पादन और आयात जारी है। अब तक लगभग 95 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का घरेलू उत्पादन हुआ है, जबकि 22.60 लाख मीट्रिक टन आयात भारत पहुंच चुका है।
कुल मिलाकर 117.6 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्धता में जोड़ा गया है। इसके अलावा खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए 13.5 लाख मीट्रिक टन डीएपी और 9 लाख मीट्रिक टन एनपीके कॉम्प्लेक्स की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है।



