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मंत्रालय ने सहकारी बैंकों की ऋण क्षमता बढ़ाने पर दिया जोर

सहकारिता मंत्रालय ने देश के सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए बुधवार को एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की, जिसमें नाबार्ड और एनसीडीसी को रियायती वित्तीय सहायता और ऋण समर्थन बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा की गई।

इस पहल से देशभर के सहकारी बैंकों और क्रेडिट सोसायटियों की ऋण वितरण क्षमता मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है।

नई दिल्ली में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता सहकारिता सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने की। बैठक में शहरी सहकारी बैंकों और संस्थागत वित्तपोषण से जुड़े प्रमुख नीतिगत एवं नियामकीय मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। इसके साथ ही यूसीबी को बैंकिंग लाइसेंस जारी करने, प्रशासनिक सुधारों और सहकारी वित्तीय तंत्र के आधुनिकीकरण से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई।

क्षेत्र के जानकारों के अनुसार, इस कदम से सहकारी संस्थाओं की तरलता स्थिति बेहतर होगी, ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में ऋण वितरण को मजबूती मिलेगी तथा वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिलेगा।

बैठक में वित्तीय सेवा विभाग के विशेष सचिव संजय लोहिया, सहकारिता मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव पंकज कुमार बंसल, DFS के अतिरिक्त सचिव डॉ. देबाशीष प्रस्ती, केंद्रीय सहकारी समितियां रजिस्ट्रार एवं संयुक्त सचिव आनंद कुमार झा, संयुक्त सचिव रमन कुमार, निदेशक श्वेता राव बी. तथा कुमार राम कृष्ण सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब सहकारिता मंत्रालय हाल के दिनों में सहकारी ऋण संस्थाओं से जुड़े मुद्दों पर लगातार परामर्श प्रक्रिया तेज कर रहा है।

कुछ दिन पहले सहकारिता मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव पंकज कुमार बंसल ने राजस्व विभाग के संयुक्त सचिव पंकज जिंदल के साथ देशभर की सहकारी क्रेडिट सोसायटियों और सहकारी बैंकों को कराधान एवं अनुपालन से जुड़ी समस्याओं पर भी चर्चा की थी।

सहकारी क्षेत्र के प्रतिनिधि लगातार यह मुद्दा उठाते रहे हैं कि कर विवादों और जटिल अनुपालन प्रक्रियाओं के कारण, विशेषकर ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी क्षेत्रों में कार्यरत छोटी सहकारी समितियां, परिचालन और वित्तीय दबाव का सामना कर रही हैं, क्योंकि उनके पास प्रशासनिक और तकनीकी संसाधनों की कमी है।

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