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एमटीएम मुद्दे पर राहत की मांग; मेहता ने शाह को लिखा पत्र

सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में बढ़ते दबाव के बीच, राष्ट्रीय शहरी सहकारी वित्त एवं विकास निगम (एनयूसीएफडीसी) के अध्यक्ष ज्योतिंद्र मेहता ने केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) के लिए तत्काल नियामकीय राहत की मांग की है।

अपने पत्र में मेहता ने वैश्विक अनिश्चितता और युद्ध जैसे हालात के कारण वित्तीय बाजारों पर पड़े गंभीर प्रभाव की ओर ध्यान आकर्षित किया। इसके चलते सरकारी प्रतिभूतियों (गवर्नमेंट सिक्योरिटीज) की कीमतों में तेज गिरावट आई है, जिससे बैंकों को बड़े पैमाने पर मार्क-टू-मार्केट (एमटीएम) नुकसान उठाना पड़ रहा है।

नियामकीय प्रावधानों के अनुसार, बैंकों को 31 मार्च 2026 तक उपलब्ध बिक्री हेतु (एएफएस) और व्यापार हेतु धारित (एचएफटी) श्रेणियों में निवेश का बाजार मूल्यांकन करना अनिवार्य है। इसके परिणामस्वरूप निवेश अवमूल्यन आरक्षित (आईडीआर) के लिए भारी प्रावधान करना पड़ रहा है, जिससे चालू वित्त वर्ष के मुनाफे पर गंभीर असर पड़ा है।

पत्र में चेतावनी दी गई है कि कई यूसीबी को परिचालन कमजोरी के कारण नहीं, बल्कि अनिवार्य प्रावधानों के चलते शुद्ध घाटा दिखाना पड़ सकता है, जबकि उनके पास सुरक्षित सरकारी प्रतिभूतियां उपलब्ध हैं। यद्यपि बैंक निवेश उतार-चढ़ाव आरक्षित (आईएफआर) रखते हैं, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों को “असाधारण” बताते हुए कहा गया है कि ये भंडार पर्याप्त नहीं हैं।

मेहता ने बताया कि इस संबंध में भारतीय रिजर्व बैंक को भी प्रतिनिधित्व सौंपा जा चुका है। प्रमुख मांगों में वित्त वर्ष 2025–26 के लिए आईडीआर प्रावधान में एकमुश्त छूट, एएफएस/एचएफटी से परिपक्वता तक धारित (एचटीएम) श्रेणी में प्रतिभूतियों के स्थानांतरण की अनुमति तथा नुकसान की चरणबद्ध समायोजन की व्यवस्था शामिल है।

उन्होंने कहा कि शहरी सहकारी बैंक जमीनी स्तर पर वित्तीय समावेशन में अहम भूमिका निभाते हैं, इसलिए समय पर राहत देना आवश्यक है, ताकि क्षेत्र में किसी व्यापक वित्तीय झटके से बचा जा सके।

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