
मुंबई स्थित सारस्वत कोऑपरेटिव बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कुल कारोबार दर्ज किया है। यह उपलब्धि न केवल बैंक की मजबूत स्थिति को दर्शाती है, बल्कि सहकारी आंदोलन के लिए भी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई है।
108 वर्ष से अधिक पुराने इस बैंक की यात्रा विश्वास, स्थिरता और निरंतर विकास की मिसाल रही है। बैंक के अध्यक्ष गौतम ठाकुर ने बताया कि बैंक ने 1 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर लिया है, जिसके ऑडिटेड आंकड़े 20 अप्रैल 2026 तक आने की संभावना है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय कर्मचारियों, प्रबंधन और निदेशक मंडल के संयुक्त प्रयासों को दिया।
उन्होंने इसे संस्थान के लिए गर्व का क्षण बताते हुए ग्राहकों के विश्वास और शेयरधारकों के निरंतर सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही, बैंक से जुड़े पूर्व पदाधिकारियों और सदस्यों के योगदान को भी याद किया, जिन्होंने इसकी मजबूत नींव रखी।
आगे की रणनीति पर बोलते हुए ठाकुर ने कहा कि वर्तमान विकास दर को देखते हुए बैंक अगले 7 से 8 वर्षों में 2 लाख करोड़ रुपये के व्यवसाय का लक्ष्य हासिल कर सकता है। उन्होंने सहकारिता मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा प्रदान किए जा रहे अनुकूल वातावरण के लिए भी आभार जताया।
विस्तार योजना के तहत, बैंक ने हाल ही में उत्तर भारत में 8 नई शाखाएं खोली हैं और अप्रैल तथा आगामी महीनों में 13 और शाखाएं खोलने की योजना है, जिससे वह अपने पारंपरिक क्षेत्रों से आगे विस्तार कर सके।
वित्त वर्ष 2025-26 कई चुनौतियों से भरा रहा, विशेष रूप से घोटाले से प्रभावित न्यू इंडिया कोऑपरेटिव बैंक के विलय जैसी जटिल प्रक्रिया के कारण बैंक को कई संचालनात्मक और प्रबंधन संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद, बैंक ने न केवल अपनी विकास गति को बनाए रखा, बल्कि मजबूती और संतुलन के साथ आगे बढ़ते हुए अपनी क्षमता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
यह उपलब्धि न केवल सारस्वत बैंक की मजबूती को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि सुशासित शहरी सहकारी बैंक प्रतिस्पर्धी बैंकिंग क्षेत्र में प्रभावी रूप से प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं। यह अन्य सहकारी बैंकों के लिए भी प्रेरणादायक है।



