
सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में डिजिटल गवर्नेंस और वित्तीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से सहकारिता मंत्रालय के सचिव आशीष कुमार भूटानी ने मंगलवार को अटल अक्षय ऊर्जा भवन में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
बैठक में सहकारी बैंकों को एनसीआरपी-सीएफसीएफआरएमएस प्लेटफॉर्म के साथ एपीआई एकीकरण से जोड़ने और उन्हें एआई-आधारित धोखाधड़ी पहचान प्रणाली ‘म्यूलहंटर.एआई’ से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया गया।
इस पहल का उद्देश्य डिजिटल अवसंरचना को मजबूत करना, धोखाधड़ी जोखिम की निगरानी को बेहतर बनाना और सहकारी संस्थाओं के बीच डेटा एकीकरण को सुगम बनाना है। अधिकारियों ने कहा कि बढ़ते साइबर खतरों और वित्तीय धोखाधड़ी के दौर में मजबूत डिजिटल सिस्टम परिचालन दक्षता, पारदर्शिता और भरोसा बढ़ाने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
बैठक में सहकारिता मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक, राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक, भारतीय स्टेट बैंक तथा भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
इसके अलावा सहकार सारथी प्राइवेट लिमिटेड और एनयूसीएफडीसी जैसे प्रमुख हितधारकों ने भी विचार-विमर्श में हिस्सा लिया, जिससे इस पहल में सहयोगात्मक दृष्टिकोण को बल मिला।
चर्चा के दौरान रियल-टाइम डेटा साझा करने, शुरुआती चरण में धोखाधड़ी की पहचान और समन्वित नियामकीय निगरानी के महत्व पर जोर दिया गया। ‘म्यूलहंटर.एआई’ प्लेटफॉर्म संदिग्ध लेनदेन की पहचान और म्यूल खातों पर अंकुश लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जिससे जमाकर्ताओं के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
अधिकारियों ने कहा कि सहकारी बैंकों को उन्नत फिनटेक इकोसिस्टम से जोड़ने से तकनीकी अंतर को कम किया जा सकेगा और उन्हें मुख्यधारा बैंकिंग मानकों के अनुरूप बनाया जा सकेगा। यह पहल “सहकार से समृद्धि” के व्यापक लक्ष्य को भी मजबूती देगी।



