
सहकारिता मंत्रालय के अंतर्गत सहकारी चुनाव प्राधिकरण (सीईए) ने विज्ञान भवन, नई दिल्ली में “बहु-राज्यीय सहकारी समितियों के चुनावों में पारदर्शिता एवं शुचिता” विषय पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया।
इस कार्यक्रम में बहु-राज्यीय सहकारी समितियों के अध्यक्ष, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, निदेशक मंडल के सदस्य, रिटर्निंग अधिकारी, जिला मजिस्ट्रेट, राज्य सहकारी चुनाव प्राधिकरणों के प्रतिनिधि, सहकारी क्षेत्र के विशेषज्ञ तथा केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारियों सहित विभिन्न हितधारकों ने भाग लिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर ने कहा कि सहकारी चुनाव प्राधिकरण द्वारा आयोजित यह संगोष्ठी सहकारी आंदोलन के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि पहली बार देशभर की बहु-राज्यीय सहकारी समितियों के प्रतिनिधि एक मंच पर एकत्रित हुए हैं, ताकि सहकारी चुनावों में पारदर्शिता और निष्पक्षता को मजबूत बनाने पर विचार-विमर्श किया जा सके।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सहकार से समृद्धि” के विज़न और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में सरकार सहकारी क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए लगातार कदम उठा रही है। उनका उद्देश्य सहकारी संस्थाओं को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और लोकतांत्रिक बनाना है, ताकि वे विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान दे सकें।
कृष्ण पाल गुर्जर ने बताया कि मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटीज (संशोधन) अधिनियम, 2023 के माध्यम से कई महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं। इनमें सबसे प्रमुख सुधार स्वतंत्र सहकारी चुनाव प्राधिकरण की स्थापना है, जिसे 11 मार्च 2024 को औपचारिक रूप से अधिसूचित किया गया। इस प्राधिकरण को बहु-राज्यीय सहकारी समितियों में स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है।
उन्होंने कहा कि संशोधित अधिनियम के तहत निदेशक मंडलों के कार्यकाल को निश्चित किया गया है, जिससे चुनावों में अनावश्यक विलंब की प्रवृत्ति पर रोक लगी है और सहकारी संस्थाओं के प्रशासन में अनुशासन आया है। उन्होंने बताया कि सहकारी चुनाव प्राधिकरण अब तक लगभग 240 चुनाव सफलतापूर्वक संपन्न करा चुका है, जबकि करीब 70 चुनाव वर्तमान में प्रगति पर हैं। आने वाले वित्तीय वर्ष में लगभग 130 और चुनाव कराए जाने की संभावना है।
मंत्री ने यह भी बताया कि संशोधित प्रावधानों के तहत निदेशक मंडल में महिलाओं के लिए दो तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए एक-एक सीट आरक्षित की गई है, जिससे सहकारी संस्थाओं के प्रबंधन में समावेशिता सुनिश्चित हो सके।
इस अवसर पर सहकारी चुनाव प्राधिकरण के अध्यक्ष देवेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि सहकारी संस्थाएं लोकतांत्रिक सदस्य नियंत्रण के सिद्धांत पर आधारित होती हैं, इसलिए चुनाव प्रक्रिया का पारदर्शी और विश्वसनीय होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सहकारी समितियों के उपनियमों में स्पष्टता होना जरूरी है, ताकि चुनावों के दौरान विवादों से बचा जा सके और मतदान अधिकार, सक्रिय सदस्यता तथा चुनाव लड़ने की पात्रता जैसे विषय स्पष्ट रूप से परिभाषित हों।
संगोष्ठी के दौरान दो तकनीकी सत्र भी आयोजित किए गए, जिनमें चुनावों के माध्यम से पारदर्शिता बढ़ाने और चुनावी प्रक्रियाओं में निष्पक्षता को मजबूत करने से जुड़े विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।
कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि सहकारी चुनावों में पारदर्शिता, निष्पक्षता और व्यापक सदस्य भागीदारी को और मजबूत किया जाएगा, ताकि सहकारी आंदोलन देश के सामाजिक-आर्थिक विकास में और अधिक प्रभावी भूमिका निभा सके।



