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इफको एमडी ने कच्चे माल के लिए वैश्विक जॉइंट वेंचर्स करने पर दिया जोर

इफको के प्रबंध निदेशक के. जे. पटेल ने कहा है कि उर्वरक क्षेत्र के लिए कच्चे माल की दीर्घकालिक और सुरक्षित उपलब्धता आज एक अहम राष्ट्रीय प्राथमिकता बन चुकी है, जो उर्वरकों की किफायती कीमत सुनिश्चित करने और देश की कृषि अर्थव्यवस्था की स्थिरता के लिए जरूरी है।

हालिया मीडिया संवाद में पटेल ने आगाह किया कि अस्थिर और महंगे वैश्विक आपूर्ति स्रोतों पर निर्भरता भारत की कृषि व्यवस्था को जोखिम में डालती है। उन्होंने कहा कि कच्चे माल की सुरक्षा सीधे तौर पर उर्वरक की कीमतों, खाद्य प्रणाली की मजबूती और करोड़ों किसानों की आर्थिक भलाई से जुड़ी है।

पटेल ने कहा कि किसान-आधारित सहकारी संस्था होने के नाते इफको उत्पादन लागत को स्थिर रखने और घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए आक्रामक बैकवर्ड इंटीग्रेशन रणनीति अपना रही है। यह केवल एक कॉरपोरेट कदम नहीं, बल्कि मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव, आपूर्ति बाधाओं और वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव के दौर में एक राष्ट्रीय आवश्यकता है।

भारत की फॉस्फेट, फॉस्फोरिक एसिड और पोटाश जैसे कच्चे माल के लिए आयात पर भारी निर्भरता बनी हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार की अस्थिरता और घरेलू मांग का दबाव लगातार बढ़ रहा है।

इन चुनौतियों से निपटने के लिए इफको वैश्विक स्तर पर संयुक्त उद्यमों के माध्यम से अपनी उपस्थिति बढ़ाने की तैयारी कर रही है। पटेल ने बताया कि श्रीलंका, जॉर्डन और सेनेगल में रणनीतिक साझेदारियों की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। श्रीलंका में उच्च गुणवत्ता वाले रॉक फॉस्फेट भंडार के आधार पर डीएपी या फॉस्फोरिक एसिड उत्पादन की संभावना पर विचार हो रहा है। जॉर्डन में इफको की जॉर्डन इंडिया फर्टिलाइज़र कंपनी में 52 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जहां फॉस्फोरिक एसिड उत्पादन को 5 लाख टन से बढ़ाकर 10 लाख टन प्रतिवर्ष करने की योजना है। वहीं, सेनेगल में रॉक फॉस्फेट के दीर्घकालिक आपूर्ति समझौतों के साथ बैकवर्ड इंटीग्रेशन मॉडल पर काम किया जा रहा है।

पटेल ने कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद वैश्विक आपूर्ति बाधाओं और कीमतों में तेज उछाल से भारत की संवेदनशीलता स्पष्ट हो गई है। ऐसे में दीर्घकालिक अनुबंध और संयुक्त उद्यम उर्वरक क्षेत्र को लागत नियंत्रण और स्थिरता प्रदान करते हैं।

उन्होंने नैनो उर्वरकों की भूमिका पर भी जोर देते हुए कहा कि नैनो यूरिया और नैनो डीएपी टिकाऊ कृषि का भविष्य हैं, जो लागत घटाने, उत्पादकता बढ़ाने और आयात निर्भरता कम करने में मदद करेंगे।

पटेल ने दोहराया कि इफको किसानों और देश की खाद्य सुरक्षा के हित में स्थिर आपूर्ति, तकनीकी नवाचार और रणनीतिक अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के माध्यम से आत्मनिर्भर उर्वरक तंत्र के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है।

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