
वैकुंठ मेहता राष्ट्रीय सहकारी प्रबंध संस्थान (वामनिकॉम), पुणे ने सशस्त्र बलों के अधिकारियों के लिए क्षमता निर्माण की दिशा में पहल करते हुए, रक्षा मंत्रालय के डीजीआर के सहयोग से संस्थान में “इनोवेशन एंड एग्रीबिजनेस मैनेजमेंट” विषय पर पुनर्वास प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया है।
28 सितंबर से 20 नवंबर तक चल रहे इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में भारतीय थल सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय वायु सेना के 52 अधिकारी भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों को कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में उद्यमिता, स्वरोजगार और आजीविका के अवसर तलाशने के लिए व्यावहारिक ज्ञान तथा प्रबंधकीय कौशल प्रदान करना है।
कार्यक्रम का उद्घाटन रक्षा मंत्रालय के पुनर्वास महानिदेशालय में दक्षिण क्षेत्र के अपर महानिदेशक ब्रिगेडियर रंजन केरन ने किया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण की वास्तविक सफलता इस बात में निहित है कि अधिकारी यहां सीखी गई बातों को अपने भविष्य के व्यावसायिक, उद्यमशील और आजीविका संबंधी अवसरों में किस प्रकार लागू करते हैं।
वामनिकॉम के निदेशक डॉ. सुवा कांता मोहंती ने छोटे स्तर के उद्यमों की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उचित योजना और प्रबंधन के साथ छोटे उद्यम भी स्थायी आय का स्रोत बन सकते हैं। सहकारी क्षेत्र के अनुभवों का उल्लेख करते हुए उन्होंने नवाचार, सामूहिक प्रयास और छोटी पहलों के माध्यम से व्यापक आर्थिक लाभ तथा सामुदायिक विकास की संभावनाओं को रेखांकित किया।
पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. अमित बोरकर ने कृषि-व्यवसाय और मूल्य-श्रृंखला प्रबंधन के महत्व पर जोर दिया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को व्यावसायिक अवसरों की पहचान, परियोजना तैयार करने, वित्तीय प्रबंधन, विपणन और व्यवहार्य उद्यम विकसित करने के व्यावहारिक पहलुओं से परिचित कराया जा रहा है।
कार्यक्रम में वामनिकॉम के प्रथम वर्ष के कृषि-व्यवसाय प्रबंधन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा के विद्यार्थियों को भी जोड़ा गया है। विद्यार्थी भागीरथी एम. और सिद्धार्थ सिंह ने उद्घाटन सत्र का संचालन किया। इससे विद्यार्थियों को प्रशिक्षण कार्यक्रम के संचालन का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने का अवसर भी मिल रहा है।
वामनिकॉम के रजिस्ट्रार डॉ. सुदाम अडलींगे ने धन्यवाद ज्ञापित किया। डॉ. अरविंद दर्शना, सहायक प्रोफेसर एवं सह-समन्वयक, तथा संस्थान के अन्य संकाय सदस्य भी कार्यक्रम से जुड़े हुए हैं।



