
भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (बीबीएसएसएल) की चौथी वार्षिक आमसभा नई दिल्ली में आयोजित हुई। आमसभा में करीब 250 सहकारी प्रतिनिधियों ने प्रत्यक्ष रूप से, जबकि 11,827 प्रतिनिधियों ने ऑनलाइन माध्यम से भाग लिया।
आमसभा में चालू वित्त वर्ष के दौरान समिति के प्रदर्शन की समीक्षा की गई और विस्तार योजनाओं पर चर्चा हुई। सामान्य निकाय ने समिति की विभिन्न पहलों को सर्वसम्मति से समर्थन दिया।
बीबीएसएसएल के वित्तीय प्रदर्शन में गठन के बाद से उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में समिति का रेवन्यू करीब 222 करोड़ रुपये रहा, जो वित्त वर्ष 2024-25 के लगभग 59.25 करोड़ रुपये से करीब चार गुना अधिक है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में समिति ने 28 लाख रुपये का लाभ दर्ज किया था।
सहकारी बीज बाजार में समिति का विस्तार भी तेजी से हुआ है। जुलाई 2026 तक कुल 38,665 सहकारी समितियां बीबीएसएसएल की सदस्य बन चुकी थीं, जिनमें 37,972 प्राथमिक कृषि ऋण समितियां (पैक्स) शामिल हैं। इसके अलावा, 33 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने ‘भारत बीज’ ब्रांड के प्रचार-प्रसार के लिए नोडल एजेंसियां नामित की हैं, जबकि 26 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
बीबीएसएसएल की स्थापना जनवरी 2023 में बहुराज्यीय सहकारी समितियां अधिनियम, 2002 के तहत की गई थी। इसे इफको, कृभको, नेफेड, एनडीडीबी और एनसीडीसी ने मिलकर स्थापित किया था और प्रत्येक प्रवर्तक ने प्रारंभ में 50 करोड़ रुपये का योगदान दिया था। समिति की अधिकृत पूंजी 500 करोड़ रुपये, जबकि चुकता पूंजी 250 करोड़ रुपये है।
समिति ने ‘भारत बीज’ ब्रांड के तहत 28 फसलों की 208 किस्मों के बीज पेश किए हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान संबंधित बीज उत्पादक किसानों के माध्यम से 75,535 मीट्रिक टन बीज का उत्पादन किया गया। समिति पारंपरिक देशी किस्मों के संरक्षण, संवर्धन और दस्तावेजीकरण पर भी काम कर रही है। उत्तराखंड में इस दिशा में एक विशेष कार्यक्रम चलाया जा रहा है।
आमसभा में सहकारिता के माध्यम से बीज अनुसंधान एवं विकास में बीबीएसएसएल की बढ़ती भूमिका पर भी चर्चा हुई। साथ ही, ‘सहकार से समृद्धि’ की दृष्टि के तहत सहकारिता मंत्रालय की विभिन्न पहलों पर विचार-विमर्श किया गया। सहकारी मॉडल के माध्यम से पैक्स और अन्य सहकारी समितियों को जोड़कर बीज उत्पादन, प्रसंस्करण, प्रमाणीकरण, ब्रांडिंग और वितरण को किसानों के करीब लाने पर जोर दिया जा रहा है।



