
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य में पीपीपी मॉडल के तहत डेयरी गतिविधियों के विस्तार के निर्देश दिए हैं। ये निर्देश मध्यप्रदेश राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के बीच हुए समझौते के अंतर्गत गठित राज्य-स्तरीय स्टीयरिंग कमेटी की बैठक में दिए गए।
मुख्यमंत्री ने सांची ब्रांड के विस्तार, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में डेयरी तकनीक से संबंधित प्रशिक्षण एवं पाठ्यक्रम शुरू करने, दुग्ध संग्रहण व्यवस्था की नियमित निगरानी, खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा दुग्ध उत्पादकों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया।
बैठक में बताया गया कि अब तक 1,241 नई दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया जा चुका है, जबकि 635 बंद पड़ी समितियों को पुनर्जीवित किया गया है। डेयरी वैल्यू चेन के डिजिटल एकीकरण के तहत भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन, बुंदेलखंड और जबलपुर की दुग्ध संघों में सॉफ्टवेयर सिस्टम लागू किए गए हैं। वहीं, इंदौर दुग्ध संघ द्वारा दूध संग्रहण के लिए एक मोबाइल एप शुरू किया गया है, जिससे दूध की मात्रा, गुणवत्ता और मूल्य की रियल-टाइम जानकारी उपलब्ध हो रही है।
राज्य सरकार ने वर्ष 2029–30 तक 26 हजार गांवों में डेयरी सहकारी नेटवर्क के विस्तार, प्रतिदिन 35 लाख लीटर दूध बिक्री तथा 63.3 लाख लीटर प्रतिदिन दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इन लक्ष्यों के अनुरूप प्रदेश में सहकारी डेयरी क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।



