ताजा खबरेंविशेष

शाह ने नेफकॉब से हर शहर में यूसीबी स्थापित करने में मदद का किया आह्वान

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित शहरी सहकारी ऋण क्षेत्र के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन ‘कोऑप कुंभ 2025’ को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया। इस अवसर पर केन्द्रीय सहकारिता राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर, सहकारिता मंत्रालय के सचिव तथा अन्य लोग उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि अर्बन कोऑपरेटिव बैंक और क्रेडिट सोसायटी के सहकारिता कुंभ का आयोजन अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के उपलक्ष्य में किया गया है। उन्होंने बताया कि बीते कुछ वर्षों में देश का शहरी सहकारी बैंकिंग क्षेत्र नए उत्साह और ऊर्जा के साथ आगे बढ़ा है।

शाह ने इस अवसर पर ‘सहकार डिजी-पे’ और ‘सहकार डिजी-लोन’ की शुरुआत की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इन पहलों के माध्यम से छोटे से छोटे शहरी सहकारी बैंकों को भी डिजिटल भुगतान और ऋण सुविधा से जोड़ा जाएगा।

केन्द्रीय मंत्री ने बताया कि सहकारिता मंत्रालय के गठन के बाद से मोदी सरकार ने कोऑपरेटिव सेक्टर में आमूलचूल परिवर्तन लाने के लिए अनेक नीतिगत निर्णय लिए हैं। उन्होंने कहा कि सभी राज्यों ने अब प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) के मॉडल बायलॉज़ को स्वीकार कर लिया है, जिससे सहकारिता आंदोलन को नई दिशा मिलेगी।

शाह ने कहा कि मंत्रालय ने चार प्रमुख लक्ष्य तय किए हैं -जिनमें युवाओं को सहकारिता से जोड़ना, सहकारी यूनिवर्सिटी की स्थापना, मजबूत समितियों का निर्माण और हर दो लाख से अधिक आबादी वाले शहर में अगले पांच वर्षों में एक अर्बन कोऑपरेटिव बैंक स्थापित करना शामिल है।

उन्होंने कहा कि अर्बन कोऑपरेटिव बैंक को मल्टी-सेक्टर दृष्टिकोण अपनाकर युवाओं, स्वयं सहायता समूहों और कमजोर वर्गों के सशक्तिकरण के लिए कार्य करना होगा। साथ ही बताया कि पिछले दो वर्षों में एनपीए को 2.8 प्रतिशत से घटाकर 0.06 प्रतिशत तक लाने में सफलता मिली है।

शाह ने कहा कि सहकारिता केवल आर्थिक प्रगति का माध्यम नहीं बल्कि सामाजिक समृद्धि का आधार है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अमूल को अंतरराष्ट्रीय सहकारिता रैंकिंग में पहला और इफ्को को दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है, जो भारत के सहकारी क्षेत्र की वैश्विक सफलता का प्रमाण है।

अमित शाह ने अंत में कहा कि “कोऑपरेटिव के बिना देश के हर नागरिक को काम और सम्मानजनक जीवन देना संभव नहीं है। अब जरूरत है कि हम पारदर्शिता और परिणामोन्मुखी दृष्टिकोण के साथ सहकारिता आंदोलन को नई ऊंचाइयों तक ले जाएं।”

Tags
Show More

Related Articles

Back to top button
Close