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3 मिनट और 3 बिन्दु : बजट पूर्व परामर्श पर सीई का कथन

प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (पैक्स) का पुरजोर समर्थन करते हुए एनसीयूआई के मुख्य कार्यकारी एन सत्यनारायण ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के व्यापक विकास के लिए चल रही पैक्स समितियों को कृषक समुदाय की इनपुट और आउटपुट जरूरतों के लिए नोडल एजेंसी में बदलने की आवश्यकता है।

सत्यनारायण ने वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा बुलाई गई कृषि और ग्रामीण विकास पर बजट पूर्व परामर्श बैठक में कहा। इस बैठक में अनुराग ठाकुर और आईसीएआर के महानिदेशक, नाबार्ड के अध्यक्ष के साथ संबंधित मंत्रालयों के सभी सचिव भी उपस्थित थे।

सरकार की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल 98 हजार पैक्स में से 63 हजार को कम्प्यूटरीकृत किया जा सकता है और मांग की गई कि इसका एक तिहाई नोडल एजेंसियों में परिवर्तित किया जाए तो ग्रामीण पुनर्निर्माण आंदोलन को बल मिल सकता है, एनसीयूआई के सीई ने अपने संक्षिप्त भाषण में कहा।

“एनसीडीसी की योजनाएं या कोई अन्य सरकारी योजनाएं इन एजेंसियों के माध्यम से लागू की जानी चाहिए। यदि मान लें कि फैक्स को एक भवन का निर्माण करना है तो मनरेगा श्रमिकों को निर्माण कार्य में लगाया जा सकता है जिससे रोजगार सृजन हो सकता है, उन्होंने समझाया।

इसी तरह बीज, उर्वरक या क्रेडिट, आदि जैसे कृषि आदानों को ये नोडल पैक्स बहुत कुशलता से किसानों से एकत्र कर सकते हैं और सीधे बाजार भेज सकते हैं या मूल्य संवर्धन करा सकते हैं, सत्यनारायण ने ऐसे निकायों के महत्व और उपयोगिता की व्याख्या करते हुए कहा।

अपनी प्रस्तुति में एनसीयूआई के मुख्य कार्यकारी ने एकत्र हुए लोगों को कई अन्य देशों में सहकारी समितियों पर कर लगाने के प्रचलन के बारे में बताया और 2006-07 की स्थिति को पुनः बहाल करने की मांग की, जब आयकर विभाग द्वारा सहकारी संस्थाओं पर कर नहीं लगाया जाता था।

“हमें आयकर विभाग द्वारा इन निकायों के उत्पीड़न के बारे में कई खबरें प्राप्त होती हैं। मैं सम्मानित सभा से ऐसे मामले की तह में जाने और ऐसे सहकारी निकायों के केवल उच्च मूल्य (5 से 10 लाख) के लेन-देन के मामले में जांच की अनुमति दिये जाने का निवेदन करता हूँ“, सत्यनारायण ने आह्वान किया।

सीई ने तीसरा बिंदु सहकारी शिक्षा और प्रशिक्षण से संबंधित उठाया। सहकारी आंदोलन के विकास और कामकाज में इसके महत्व पर जोर देते हुए सत्यनारायण ने इस दिशा में समर्थन और जोर देने की वकालत की। उन्होंने कहा, ”एनसीयूआई मुख्य रूप से देश-भर के सहकारी नेताओं को प्रशिक्षण प्रदान करती है अगर अनुदान राशि 100 प्रतिशत संभव नहीं है तो कम से कम 50 प्रतिशत देने की आवश्यकता है।”

हालांकि सत्यनारायण ने केंद्रीय मंत्री की सराहना की, क्योंकि उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने कृषि और सहकारी पर नवीन विचारों वाले लोगों को आगे आने और विचारों को साझा करने के लिय आमंत्रित किया। केंद्रीय वित्त मंत्री के अलावा बैठक में राज्य मंत्री–अनुराग उपस्थित ठाकुर, नीति आयोग सदस्य- डॉ. रमेश चंद्र, वित्त सचिव, व्यय सचिव, राजस्व सचिव, सचिव -कृषि और सहकारिता, सचिव– ग्रामीण विकास शामिल थे।

महानिदेशक आईसीएआर, मुख्य आर्थिक सलाहकार, सचिव, एडीएफ, सचिव, मत्स्य विभाग, अध्यक्ष, सीबीडीटी और वित्त मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

 

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