
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) के मुख्यालय में निगम की 93वीं महापरिषद (जनरल काउंसिल) की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में उन्होंने वर्ष 2030-31 तक एनसीडीसी के वार्षिक वित्तीय संवितरण को बढ़ाकर 4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया।
बैठक में एनसीडीसी के वित्तीय एवं संस्थागत प्रदर्शन, सहकारी क्षेत्र में वित्तपोषण के विस्तार, नई बहुराज्यीय सहकारी संस्थाओं के विकास, ग्रामीण आजीविका को मजबूत बनाने और निगम की भावी कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई।
अपने संबोधन में शाह ने पिछले पांच वर्षों में एनसीडीसी के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि निगम ने वित्तीय उपलब्धियों, ऋण स्वीकृतियों और संवितरण में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने शून्य नेट एनपीए बनाए रखने और देश के सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में अपनी उपस्थिति स्थापित करने के लिए अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बधाई दी।
शाह ने कहा कि पिछले पांच वर्ष एनसीडीसी के लिए स्वर्णिम काल रहे हैं, लेकिन निगम को अपनी उपलब्धियों से संतुष्ट होकर नहीं रुकना चाहिए। उन्होंने अगले 25 वर्षों के लिए व्यापक रोडमैप तैयार करने और पूंजी जुटाने के वैकल्पिक माध्यमों, वित्तीय स्वायत्तता तथा संस्थागत सुधारों पर विचार करने के लिए विशेषज्ञों का समूह गठित करने का सुझाव दिया।
उन्होंने कहा कि सहकारी संस्थाओं में पेशेवर प्रबंधन को बढ़ावा देना आवश्यक है, जबकि उनका मूल आधार सहकारिता के सिद्धांत ही रहने चाहिए। एनसीडीसी को नाबार्ड, राज्य सहकारी बैंकों और वाणिज्यिक बैंकों के साथ कंसोर्टियम एवं सह-वित्तपोषण मॉडल विकसित करने की संभावनाओं पर भी काम करना चाहिए।
बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, सहकारिता मंत्रालय के गठन से 25 अक्टूबर 2026 तक एनसीडीसी ने देशभर की सहकारी संस्थाओं को कुल 4,14,586 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता वितरित की है। वित्त वर्ष 2025-26 में निगम ने 1,55,408 करोड़ रुपये की परियोजनाएं स्वीकृत कीं और 1,27,596 करोड़ रुपये का संवितरण किया। इसी अवधि में निगम ने 1,475 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया तथा उसकी ऋण वसूली दर 99.84 प्रतिशत रही। नेट एनपीए शून्य दर्ज किया गया।
शाह ने वित्तीय संवितरण के लिए 2026-27 में 1.70 लाख करोड़ रुपये, 2027-28 में 2.10 लाख करोड़ रुपये, 2028-29 में 2.50 लाख करोड़ रुपये, 2029-30 में 3.50 लाख करोड़ रुपये और 2030-31 में 4 लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य निर्धारित करने पर जोर दिया।
उन्होंने मत्स्यपालन, डेयरी, सहकारी बैंकिंग और सहकारी चीनी मिलों में नए अवसर विकसित करने के साथ पूर्वोत्तर क्षेत्र को 2030 तक दूध, अंडे, मछली और मांस के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने पर भी विशेष बल दिया।



