
महाराष्ट्र की सहकारिता नीति तैयार करने के लिए गठित समिति की चौथी बैठक बुधवार को मुंबई स्थित महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक (एमएससी बैंक) के मुख्यालय में आयोजित हुई। बैठक में छह उपसमितियों द्वारा प्रस्तुत सिफारिशों पर चर्चा की गई।
करीब एक घंटे चली इस बैठक में सरकारी अधिकारियों, समिति के सदस्यों और सहकारी क्षेत्र के प्रतिनिधियों सहित लगभग 37 लोगों ने भाग लिया। बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रस्तावित नीति के मसौदे को अंतिम रूप देने से पहले 15 दिनों के लिए सार्वजनिक किया जाएगा, ताकि सहकारी संस्थाओं और आम लोगों से सुझाव प्राप्त किए जा सकें।
छह उपसमितियों ने अपने-अपने अध्यक्षों के नेतृत्व में रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस प्रक्रिया में सतीश मराठे, विद्याधर अनास्कर और सुहास पटवर्धन सहित कई वरिष्ठ सहकारी नेता शामिल रहे। विद्याधर अनास्कर ने बुनियादी पहलुओं और नवाचार से जुड़े विचार-विमर्श में योगदान दिया, जबकि सुहास पटवर्धन ने आवास संबंधी उपसमिति का नेतृत्व किया।
भारतीय सहकारिता से बातचीत में वरिष्ठ सहकारी नेता सतीश मराठे ने प्रस्तावित नीति में स्व-विनियमन, पूंजी निर्माण और तेज ऋण वसूली व्यवस्था को प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में लाखों सहकारी संस्थाएं हैं, ऐसे में सहकारिता विभाग के लिए प्रत्येक संस्था की समस्याओं का अलग-अलग समाधान करना कठिन है।
इसलिए उन्होंने विशेष रूप से ऋण सहकारी संस्थाओं के लिए क्षेत्रवार स्व-विनियामक संगठन (एसआरओ) स्थापित करने का सुझाव दिया, ताकि संस्थाओं के प्रशासन, संचालन और निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जा सके।
मराठे ने सहकारी संस्थाओं के लिए समर्पित पूंजी प्रावधानों की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि सहकारी संस्थाओं को वित्तीय सहायता और पूंजी उपलब्ध कराने के लिए नए वित्तीय साधन विकसित किए जाने चाहिए। इसके अलावा, महाराष्ट्र में ऋण वसूली की धीमी और जटिल प्रक्रिया में सुधार करते हुए इसे अधिक तेज और प्रभावी बनाने की आवश्यकता बताई।
बैठक में सहकारिता के मूल्यों को स्कूली शिक्षा से जोड़ने का प्रस्ताव भी चर्चा में आया। महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक ने सहकारिता के सिद्धांतों पर आधारित एक प्रारूप सहकारी प्रार्थना तैयार की है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को शुरुआती उम्र से ही सहकारिता आंदोलन और उसके मूल्यों से परिचित कराना है। इस प्रारूप पर सुझाव आमंत्रित किए गए हैं और इसे मुख्यमंत्री द्वारा औपचारिक रूप से जारी किए जाने का प्रस्ताव है।
बैठक में राज्य के सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटिल, मंत्री जयकुमार रावल, पंकज भोयर, विवेक जुंगड़े, सतीश मराठे, सुहास पटवर्धन तथा वरिष्ठ सरकारी अधिकारी उपस्थित थे। सहकारिता विभाग और सहकारी चीनी आयुक्तालय के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।
उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र की नई सहकारिता नीति तैयार करने की प्रक्रिया पिछले करीब आठ महीनों से चल रही है। बुधवार को हुई बैठक इस सिलसिले में चौथी बैठक थी। सार्वजनिक सुझावों की समीक्षा के बाद समिति की एक और बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें नीति को अंतिम रूप दिया जाएगा।



