
केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने शनिवार को कर्नाटक के बेलगावी जिले के चिकोडी तालुका के नांदी में श्री बीरेश्वर को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी लिमिटेड (मल्टी-स्टेट) के नए प्रधान कार्यालय का उद्घाटन किया।
कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी, सहकारिता क्षेत्र के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे। यह अवसर संस्था के 36वें स्थापना दिवस का भी था।
समारोह को संबोधित करते हुए मोहोल ने बताया कि श्री बीरेश्वर को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी के करीब 4.60 लाख सदस्य, देशभर में 263 शाखाएं हैं और इसका कारोबार 9,000 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। उन्होंने संस्था की टीम को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी।
मोहोल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में सहकारिता क्षेत्र को मजबूत, आधुनिक, पारदर्शी और व्यापक बनाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने कर्नाटक में सहकारिता के विकास में अण्णासाहेब जोल्ले और उनकी पत्नी के योगदान का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि देश में 8.5 लाख से अधिक सहकारी संस्थाएं कार्यरत हैं और करीब 32 करोड़ लोग इनके सदस्य हैं। उनके अनुसार लगभग 20 से 25 करोड़ परिवार किसी न किसी रूप में सहकारिता से जुड़े हुए हैं। मोहोल ने कहा कि सहकारिता के महत्व को देखते हुए केंद्र में अलग सहकारिता मंत्रालय की स्थापना की गई और पिछले करीब पांच वर्षों में इस क्षेत्र में व्यापक बदलाव हुए हैं।
मोहोल ने बताया कि सहकारिता क्षेत्र के लिए 160 से अधिक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। करीब 80,000 प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) के कम्प्यूटरीकरण के लिए लगभग 3,000 करोड़ रुपये का काम शुरू किया गया है। साथ ही गांव स्तर की सहकारी संस्थाओं को 25 प्रकार की आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की पहल की गई है।
उन्होंने बताया कि किसानों के लिए सहकारी इकोसिस्टम को मजबूत करने के उद्देश्य से तीन राष्ट्रीय स्तर की मल्टी-स्टेट सहकारी संस्थाओं का गठन किया गया है, जिनसे करीब 70,000 सहकारी संस्थाएं जुड़ी हैं।
शहरी सहकारी बैंकों के संदर्भ में मोहोल ने एनयूसीएफडीसी का उल्लेख करते हुए कहा कि यह अर्बन कोऑपरेटिव बैंकों के लिए साझा सहयोग और समाधान का मंच उपलब्ध करा रहा है। ग्रामीण सहकारी बैंकों के लिए ‘सहकार सारथी’ प्लेटफॉर्म का भी उल्लेख किया गया।
उन्होंने कहा कि अगले करीब 10 वर्षों में सहकारिता क्षेत्र के लिए लगभग 17 लाख प्रशिक्षित मानव संसाधन की जरूरत होगी। इसी दिशा में ‘त्रिभुवन’ सहकारी विश्वविद्यालय को महत्वपूर्ण पहल बताते हुए उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने में भूमिका निभाएगा।
मोहोल ने श्वेत क्रांति, सहकार बीमा और भारत टैक्सी जैसी नई पहलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि यह सहकारी संस्थाओं को वित्तीय और संस्थागत सहायता उपलब्ध कराता है। उन्होंने विश्वास जताया कि श्री बीरेश्वर को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी जैसी संस्थाएं ‘सहकार से समृद्धि’ के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहेंगी।



