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एपी यूसीबी फेडरेशन का आरबीआई को सुझाव; स्वायत्तता पर हो जोर

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा अर्बन कोऑपरेटिव बैंकों (यूसीबी) के लिए मॉडल उपनियम तैयार करने हेतु गठित समिति को आंध्र प्रदेश स्टेट कोऑपरेटिव अर्बन बैंक्स एंड क्रेडिट सोसाइटीज फेडरेशन लिमिटेड ने सहकारी बैंकों की संवैधानिक पहचान, लोकतांत्रिक नियंत्रण और स्वायत्त कार्यप्रणाली की रक्षा करने का आग्रह किया है।

आरबीआई समिति को भेजे गए एक विस्तृत सुझाव में फेडरेशन ने प्रस्तावित यूसीबी प्रशासनिक ढांचे को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं।

फेडरेशन ने कहा कि मॉडल उपनियम संबंधित राज्य के सहकारिता कानूनों, नियमों अथवा लागू होने पर बहु-राज्य सहकारी समितियां अधिनियम के संवैधानिक और वैधानिक ढांचे के अनुरूप होने चाहिए। फेडरेशन का कहना है कि चुनाव, निदेशक मंडल का कार्यकाल और निर्वाचित निदेशकों से जुड़े अन्य मामलों का संचालन सहकारी कानूनों के तहत ही होना चाहिए, ताकि सदस्यों का लोकतांत्रिक नियंत्रण बरकरार रहे।

फेडरेशन ने डिजिटल बैंकिंग, साइबर सुरक्षा, राइट-ऑफ और वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) जैसे आरबीआई के ऐसे नियामकीय प्रावधानों को स्थायी उपनियमों में शामिल करने का भी विरोध किया, जिनमें समय-समय पर बदलाव होते रहते हैं। फेडरेशन का कहना है कि ऐसे विषय आरबीआई के नियामकीय ढांचे के अंतर्गत ही रहने चाहिए।

फेडरेशन ने 97वें संविधान संशोधन का भी उल्लेख किया, जिसमें सहकारी समितियों के गठन के अधिकार को मान्यता देते हुए स्वैच्छिक गठन, स्वायत्त कार्यप्रणाली, लोकतांत्रिक सदस्य नियंत्रण और पेशेवर प्रबंधन पर जोर दिया गया है।

इसके अलावा, फेडरेशन ने पांडुरंग गणपति चौगुले बनाम विश्वासराव पाटिल मुरगुड सहकारी बैंक लिमिटेड मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए बैंकिंग कारोबार के नियमन और सहकारी संस्थाओं के सहकारी स्वरूप के नियमन के बीच अंतर को रेखांकित किया।

फेडरेशन ने आरबीआई समिति से यूसीबी के आकार, सदस्य संख्या, भौगोलिक विस्तार, तकनीकी क्षमता और कारोबारी मॉडल में व्यापक अंतर को देखते हुए प्रशासनिक मानदंडों में पर्याप्त लचीलापन बनाए रखने का आग्रह किया।

अपने सुझाव में फेडरेशन ने समिति से अनुरोध किया कि यूसीबी के प्रशासन से जुड़े संवैधानिक और वैधानिक मुद्दों पर मद्रास हाई कोर्ट सहित विभिन्न उच्च न्यायालयों में लंबित मामलों का न्यायिक निपटारा होने तक उपनियमों में अनिवार्य संशोधन को स्थगित रखा जाए।

फेडरेशन ने कहा कि एक संतुलित मॉडल में बैंकिंग क्षेत्र के विवेकपूर्ण नियमन के साथ राज्य सहकारी कानूनों, पेशेवर प्रबंधन के साथ लोकतांत्रिक सदस्य नियंत्रण तथा आवश्यक बैंकिंग मानकों में एकरूपता के साथ अलग-अलग यूसीबी की जरूरतों के अनुरूप लचीलेपन का संतुलन होना चाहिए।

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