
भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को शहरी सहकारी बैंकों के लिए ‘ऑन-टैप’ लाइसेंसिंग पर मसौदा दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिससे दो दशक से अधिक समय बाद नए बैंकिंग लाइसेंस का रास्ता खुल गया है। केंद्रीय बैंक ने प्रस्तावित ढांचे पर हितधारकों से 5 सितंबर 2026 तक टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।
मसौदा ढांचे के तहत नए शहरी सहकारी बैंक लाइसेंस के लिए आवेदन लगातार यानी ‘ऑन-टैप’ आधार पर जमा किए जा सकेंगे। हालांकि, आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूरा करने वाले आवेदकों को भी लाइसेंस बेहद चयनात्मक आधार पर ही दिए जाएंगे।
प्रारंभिक चरण में बहु-राज्य सहकारी समितियां अधिनियम, 2002 के तहत पंजीकृत बहु-राज्य क्रेडिट सहकारी समितियां ही नए शहरी सहकारी बैंक लाइसेंस के लिए आवेदन करने की पात्र होंगी। ऐसी समितियां कम से कम 10 वर्षों से अस्तित्व में होनी चाहिए, उनके पास न्यूनतम 10,000 करोड़ रुपये की जमा राशि होनी चाहिए और पिछले वित्त वर्ष की 31 मार्च को लेखापरीक्षित वित्तीय विवरणों के आधार पर उनकी न्यूनतम 300 करोड़ रुपये की निवल संपत्ति होनी चाहिए।
आवेदकों को पिछले पांच वर्षों के दौरान सकारात्मक और निरंतर सुधार वाला वित्तीय एवं परिचालन रिकॉर्ड भी प्रदर्शित करना होगा। इसके अलावा, उनका जोखिम-भारित परिसंपत्तियों की तुलना में पूंजी अनुपात कम से कम 12 प्रतिशत होना चाहिए और शुद्ध गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां 3 प्रतिशत से कम होनी चाहिए।
मसौदे में मजबूत शासन व्यवस्था के मानदंड भी निर्धारित किए गए हैं। कोई भी सदस्य 5 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी नहीं रख सकेगा। निदेशकों को आरबीआई के ‘उपयुक्त एवं योग्य’ मानदंडों को पूरा करना होगा तथा वे किसी बैंक या वित्तीय संस्थान के बकाएदार नहीं होने चाहिए। प्रस्तावित बैंक के निदेशकों को कार्यकारी पद संभालने की अनुमति नहीं होगी।
पात्र समितियों को पांच वर्ष की विस्तृत व्यवसाय योजना प्रस्तुत करनी होगी, जिसमें वित्तीय अनुमान, शाखा विस्तार, प्रौद्योगिकी अपनाने, जोखिम प्रबंधन, मानव संसाधन रणनीति, प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को ऋण देने, नकद आरक्षित अनुपात और सांविधिक तरलता अनुपात संबंधी मानदंडों के अनुपालन तथा गैर-बैंकिंग गतिविधियों को अलग करने की योजना शामिल होगी।
आवेदन आरबीआई के ‘प्रवाह’ पोर्टल के माध्यम से जमा करना होगा। इसके साथ केंद्रीय सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार से अनापत्ति प्रमाणपत्र, समिति को बैंक में परिवर्तित करने की मंजूरी देने वाला सदस्यों का प्रस्ताव और अन्य निर्धारित दस्तावेज जमा करने होंगे।
प्रारंभिक जांच के बाद आरबीआई उचित जांच-पड़ताल और निरीक्षण करेगा। इसके बाद प्रस्ताव को आंतरिक जांच समिति के समक्ष रखा जाएगा और अंततः केंद्रीय बोर्ड की समिति द्वारा इस पर विचार किया जाएगा। किसी आवेदक को दी गई ‘सैद्धांतिक मंजूरी’ 18 महीने तक वैध रहेगी।
मसौदे में सफल आवेदकों के लिए मजबूत सूचना प्रौद्योगिकी और साइबर सुरक्षा ढांचा स्थापित करना, कोर बैंकिंग समाधान लागू करना और निर्धारित शासन मानदंडों का पालन करना भी अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा, उन्हें अपने उपनियमों में आरबीआई के नियमों के अनुरूप संशोधन करना होगा और बैंकिंग परिचालन शुरू करने से पहले जमा बीमा और ऋण गारंटी निगम से जमा बीमा प्राप्त करना होगा।
आरबीआई के अनुसार, यह प्रस्ताव जनवरी 2026 में जारी किए गए चर्चा पत्र के बाद लाया गया है और शहरी सहकारी बैंकिंग क्षेत्र की बेहतर हुई वित्तीय स्थिति को दर्शाता है। साथ ही, इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल वित्तीय रूप से मजबूत और बेहतर शासन व्यवस्था वाली सहकारी समितियों को ही बैंकों में परिवर्तित करने के लिए विचार किया जाए।



