
कर्नाटक के कनारा जिला केंद्रीय सहकारी (डीसीसी) बैंक के अध्यक्ष और येल्लापुर के विधायक एवं पूर्व मंत्री एस.एम. हेब्बार ने कहा है कि सहकारी बैंकों के निदेशकों की पात्रता और कार्यकाल का निर्धारण कर्नाटक सहकारी समितियां अधिनियम, 1959 के तहत होता है। उन्होंने कहा कि यह विषय राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है, न कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के।
यह बात हेब्बार ने भारतीय सहकारिता से बातचीत में सहकारी बैंकों के निदेशकों के कार्यकाल और पात्रता संबंधी आरबीआई के निर्देशों को लेकर चल रहे कानूनी विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कही। उन्होंने कहा कि सहकारी बैंकों के चुनाव राज्य सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण द्वारा कर्नाटक सहकारी समितियां अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार कराए जाते हैं।
हेब्बार ने कहा कि निर्वाचित निदेशक अपना जनादेश बैंक के सदस्यों से प्राप्त करते हैं और उन्हें केवल राज्य अधिनियम में निर्धारित आधारों, जैसे ऋण चूक, आपराधिक दोषसिद्धि अथवा अन्य वैधानिक अयोग्यता के मामलों में ही अयोग्य ठहराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि निदेशकों के कार्यकाल से जुड़े मामलों में आरबीआई के निर्देश लागू नहीं होने चाहिए।
उन्होंने कहा, “आरबीआई की जिम्मेदारी बैंकिंग परिचालन का विनियमन करना, जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा करना और वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करना है। लेकिन निदेशकों के चुनाव और उनके कार्यकाल से जुड़े विषय राज्य के सहकारी कानून के तहत लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था का हिस्सा हैं।”
हेब्बार ने कहा कि सहकारी संस्थाएं लोकतांत्रिक शासन और सदस्य भागीदारी के सिद्धांतों पर संचालित होती हैं। इसलिए सहकारी क्षेत्र की स्वायत्तता का सम्मान किया जाना चाहिए, जबकि आरबीआई को वित्तीय विनियमन, वित्तीय स्थिरता और जमाकर्ताओं के हितों की सुरक्षा पर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
करीब 5,000 करोड़ रुपये के कुल कारोबार वाला कनारा डीसीसी बैंक कर्नाटक के सबसे पुराने सहकारी बैंकों में से एक है। हेब्बार का यह बयान ऐसे समय आया है, जब सहकारी बैंकों के निदेशकों के कार्यकाल और पात्रता पर आरबीआई के अधिकारों को चुनौती देने वाला मामला कर्नाटक उच्च न्यायालय की बेंगलुरु पीठ में विचाराधीन है।
उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत देते हुए आरबीआई के संबंधित निर्देशों के अमल पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। मामले की अगली सुनवाई इस महीने के अंत में होने की संभावना है। फिलहाल यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है।



