
राष्ट्रीय सहकारिता नीति-2025 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए गठित राष्ट्रीय स्तरीय नीति कार्यान्वयन एवं निगरानी समिति की पहली बैठक गुरुवार को नई दिल्ली स्थित अटल अक्षय ऊर्जा भवन में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता सहकारिता मंत्रालय के सचिव एवं समिति के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने की।
बैठक में राष्ट्रीय सहकारिता नीति-2025 को जमीनी स्तर पर लागू करने की रणनीति, संस्थागत मजबूती, डिजिटल परिवर्तन, क्षमता निर्माण, सदस्यता विस्तार तथा सहकारिता आधारित समावेशी एवं सतत आर्थिक विकास पर विस्तृत चर्चा हुई। समिति ने केंद्र सरकार के मंत्रालयों, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों तथा राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया।
बैठक में इफको के अध्यक्ष दिलीप संघाणी, सहकारिता मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव सिद्धार्थ जैन, संयुक्त सचिव आनंद कुमार झा, रमन कुमार और शिव पाल सिंह, “त्रिभुवन” सहकारी विश्वविद्यालय के कुलपति, नाबार्ड के अध्यक्ष तथा विभिन्न मंत्रालयों, राष्ट्रीय सहकारी महासंघों और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
समिति को संबोधित करते हुए डॉ. भूटानी ने कहा कि राष्ट्रीय सहकारिता नीति-2025 का उद्देश्य सहकारी संस्थाओं को अधिक पारदर्शी, तकनीक-सक्षम, व्यावसायिक रूप से प्रबंधित और सदस्य-केंद्रित बनाना है। उन्होंने सभी हितधारकों से नीति के उद्देश्यों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए मिलकर कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मजबूत और आधुनिक सहकारी संस्थाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देंगी तथा विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
बैठक के दौरान समिति ने नीति के छह प्रमुख रणनीतिक स्तंभों पर चर्चा की, जिनमें सहकारी संस्थाओं की बुनियाद को मजबूत करना, उन्हें अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना, भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना, समावेशिता बढ़ाना, नए क्षेत्रों में विस्तार करना तथा युवाओं को सहकारिता आंदोलन से जोड़ना शामिल है।
समिति ने प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) को बहुउद्देश्यीय सेवा केंद्रों के रूप में विकसित करने, प्रत्येक जिले में मॉडल सहकारी गांव स्थापित करने, डेयरी और मत्स्य सहकारी समितियों का विस्तार करने तथा सहकारी संस्थाओं में डिजिटल और डेटा आधारित प्रबंधन प्रणालियों को मजबूत करने पर भी विचार किया।
बैठक में राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस, पैक्स के कंप्यूटरीकरण, “त्रिभुवन” सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना तथा राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड, राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक्स लिमिटेड और भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड जैसी पहलों की प्रगति की समीक्षा भी की गई।
समिति ने सहकारी सदस्यता बढ़ाने, महिलाओं, युवाओं और छोटे किसानों की भागीदारी मजबूत करने तथा सहकारी क्षेत्र के आर्थिक योगदान को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। राष्ट्रीय सहकारिता नीति-2025 के तहत वर्ष 2035 तक सहकारी सदस्यता को 50 करोड़ तक पहुंचाने और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में सहकारी क्षेत्र के योगदान को तीन गुना बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।



