
राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) देश के सहकारिता क्षेत्र को मजबूत बनाने में एक केंद्रीय स्तंभ के रूप में उभर रहा है। लक्षित वित्तीय और संस्थागत हस्तक्षेपों के माध्यम से यह संस्था किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
सहकारिता मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, एनसीडीसी ने हाल के वर्षों में अपनी वित्तीय सहायता में उल्लेखनीय वृद्धि की है। वर्ष 2020-21 में जहां इसका वितरण 24,733 करोड़ रुपये था, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर 95,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। चालू वित्त वर्ष में अब तक 1.4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की स्वीकृति और करीब 1 लाख करोड़ रुपये का वितरण किया जा चुका है, जो सहकारी क्षेत्रों में इसकी तेजी से बढ़ती पहुंच को दर्शाता है।
डेयरी क्षेत्र में एनसीडीसी की डेयरी सहकार योजना विशेष रूप से प्रभावी रही है। अक्टूबर 2021 से अब तक इस योजना के तहत देशभर की लगभग 20,000 डेयरी सहकारी समितियों को 765.98 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। गुजरात और राजस्थान जैसे राज्य इसके प्रमुख लाभार्थी रहे हैं, जहां इस सहायता से डेयरी अवसंरचना के विकास, आधुनिकीकरण और विस्तार को बढ़ावा मिला है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हुई है।
एनसीडीसी ने सहकारी ढांचे के तहत किसान उत्पादक संगठनों को बढ़ावा देने में भी अहम भूमिका निभाई है। अब तक 1,800 से अधिक ऐसे संगठनों के गठन में सहयोग किया गया है, जिससे किसानों को बेहतर बाजार संपर्क, उचित मूल्य और मजबूत सौदेबाजी क्षमता प्राप्त हो रही है। इसके अलावा, इन संगठनों और क्लस्टर आधारित व्यावसायिक इकाइयों को 245 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता दी गई है।
मत्स्य क्षेत्र में भी एनसीडीसी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। पारंपरिक सहकारी समितियों को मछुआरा उत्पादक संगठनों में बदलने की दिशा में 280.65 करोड़ रुपये की लागत से 1,000 समितियों को सशक्त बनाने की योजना पर कार्य किया जा रहा है। इससे मत्स्य क्षेत्र के आधुनिकीकरण और मछुआरा समुदाय की आय में वृद्धि की उम्मीद है।
ऋण तक पहुंच को आसान बनाने के लिए एनसीडीसी ने फ्लोटिंग ब्याज दर और विभिन्न ऋण मॉडल जैसे सुधार लागू किए हैं, जिससे सहकारी संस्थाओं के लिए कर्ज सस्ता और सुलभ हुआ है। साथ ही, क्रेडिट गारंटी योजनाओं के तहत बिना जमानत ऋण की सुविधा का विस्तार भी किया गया है।
संस्था ने अपनी भौगोलिक पहुंच का विस्तार करते हुए पूर्वोत्तर और दूरदराज क्षेत्रों में नए क्षेत्रीय और उप-कार्यालय स्थापित किए हैं। इसके अलावा, सरकार द्वारा स्वीकृत 2,000 करोड़ रुपये के अनुदान से एनसीडीसी को बाजार से 20,000 करोड़ रुपये तक जुटाने में मदद मिलेगी, जिससे इसकी ऋण देने की क्षमता और मजबूत होगी।
वित्तीय सहायता के अलावा, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम ने राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड जैसे संस्थानों के साथ साझेदारी कर तकनीकी सहयोग, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर भी विशेष जोर दिया है, जिससे सहकारी संस्थाओं की दक्षता और स्थिरता में निरंतर सुधार हो रहा है।



