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नैनो उर्वरकों को मिल रही है व्यापक स्वीकृति: इफको एमडी

भारत में अगली पीढ़ी के कृषि इनपुट्स की ओर संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है और देशभर में किसान नैनो उर्वरकों को तेजी से अपना रहे हैं। इस प्रवृत्ति को रेखांकित करते हुए इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड (इफको) के प्रबंध निदेशक के. जे. पटेल ने कहा कि नैनो आधारित पोषक तत्वों के बढ़ते उपयोग से उत्पादकता और पर्यावरणीय स्थिरता दोनों में ठोस सुधार देखने को मिल रहा है।

पटेल के अनुसार, नैनो उर्वरकों का बढ़ता उपयोग भारत सरकार द्वारा हाल ही में साझा की गई प्रगति के अनुरूप है, जिसमें इन्हें आधुनिक कृषि पद्धतियों का एक महत्वपूर्ण घटक बताया गया है।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के तहत किए गए व्यापक फील्ड परीक्षणों में नैनो उर्वरकों ने पारंपरिक यूरिया की खपत को 25 से 50 प्रतिशत तक कम करने की क्षमता दिखाई है, वहीं विभिन्न फसलों में 3 से 8 प्रतिशत तक उत्पादन वृद्धि दर्ज की गई है। विविध कृषि-जलवायु क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर किए गए प्रदर्शनों ने इन परिणामों को और मजबूत किया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि नैनो उर्वरक अत्यधिक उर्वरक उपयोग, मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट और बढ़ती लागत जैसी लंबे समय से चली आ रही चुनौतियों का प्रभावी समाधान प्रस्तुत करते हैं। उच्च पोषक तत्व दक्षता और लक्षित आपूर्ति के कारण ये प्रिसिजन एग्रीकल्चर की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।

इफको ने नैनो यूरिया, नैनो डीएपी, नैनो जिंक और नैनो कॉपर जैसे उन्नत नैनो उर्वरकों का विकास और व्यावसायीकरण किया है। ये उत्पाद देश में ही निर्मित हैं और फसलों को अधिक प्रभावी व पर्यावरण अनुकूल तरीके से पोषण प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

इनमें से नैनो यूरिया को विशेष रूप से किसानों के बीच व्यापक स्वीकार्यता मिली है। एक बोतल नैनो यूरिया कम से कम एक बोरी पारंपरिक यूरिया के बराबर प्रभावी मानी जाती है, जिससे लागत में कमी के साथ-साथ नाइट्रोजन के अत्यधिक उपयोग से होने वाले पर्यावरणीय दुष्प्रभाव भी कम होते हैं। सरकार भी उर्वरक सब्सिडी के बोझ को घटाने और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के लिए नैनो उर्वरकों को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित कर रही है।

नैनो उर्वरकों को बढ़ावा देना आत्मनिर्भर भारत और आत्मनिर्भर कृषि जैसी राष्ट्रीय पहलों से भी जुड़ा हुआ है, जिनका उद्देश्य कृषि इनपुट्स में आत्मनिर्भरता बढ़ाना और किसानों की आय में सुधार करना है।

कृषि वैज्ञानिकों और नीति-निर्माताओं का मानना है कि नैनो उर्वरकों का व्यापक उपयोग देश की खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण, दोनों लक्ष्यों को हासिल करने में अहम योगदान दे सकता है।

पटेल ने नैनो उर्वरकों को “कम इनपुट, अधिक उत्पादन” के सिद्धांत का प्रतीक बताते हुए कहा कि इफको नवाचार और किसान-केंद्रित पहलों के माध्यम से इस परिवर्तन को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

जैसे-जैसे इनका उपयोग बढ़ रहा है, नैनो उर्वरक भारतीय कृषि में पोषण प्रबंधन के तरीके को नया रूप देने के साथ देश को कृषि नवाचार के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर अग्रसर कर रहे हैं।

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