
केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने लोकसभा में जानकारी दी है कि खरीफ 2025 तथा वर्तमान रबी 2025–26 फसल सत्र के दौरान उत्तर प्रदेश सहित देश के किसी भी राज्य में रासायनिक उर्वरकों की कोई कमी नहीं रही है।
सांसद वीरेंद्र सिंह द्वारा पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में मंत्री ने बताया कि यूरिया, डाय-अमोनियम फॉस्फेट, म्यूरेट ऑफ पोटाश तथा नाइट्रोजन-फॉस्फोरस-पोटाश मिश्रित उर्वरकों की उपलब्धता पूरे देश में पर्याप्त रही है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक फसल सत्र से पूर्व कृषि एवं किसान कल्याण विभाग राज्यों की आवश्यकता का राज्यवार और माहवार आकलन करता है। इस आकलन के आधार पर उर्वरक विभाग उर्वरकों का आवंटन करता है तथा एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से उनकी ढुलाई और वितरण की निरंतर निगरानी करता है, जिससे किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध हो सकें।
भारतीय किसान उर्वरक सहकारी लिमिटेड की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने बताया कि इस सहकारी संस्था का कुल उर्वरक उत्पादन वर्ष 2023–24 में 88.93 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर वर्ष 2024–25 में 93.10 लाख मीट्रिक टन हो गया है। कांडला, पारादीप, आंवला और फूलपुर स्थित संयंत्रों का उत्पादन वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
वित्त वर्ष 2025–26 की अप्रैल से जनवरी अवधि के दौरान संस्था ने 41.24 लाख मीट्रिक टन यूरिया का उत्पादन किया, जो वित्त वर्ष 2024–25 की समान अवधि में उत्पादित 40.66 लाख मीट्रिक टन से अधिक है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि उर्वरक विभाग द्वारा निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप उत्पादन और आपूर्ति में किसी प्रकार की कमी की सूचना नहीं है।
सरकार द्वारा घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए मंत्री ने बताया कि नई निवेश नीति–2012 के अंतर्गत छह नए यूरिया संयंत्र स्थापित किए गए हैं।
इनमें रामागुंडम उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड, हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड, मैटिक्स उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड और चंबल उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड की परियोजनाएँ शामिल हैं। इन पहलों के परिणामस्वरूप देश की स्वदेशी यूरिया उत्पादन क्षमता वर्ष 2014–15 के 207.54 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर वर्ष 2023–24 में 283.74 लाख मीट्रिक टन हो गई है।
भारत ने वर्ष 2023–24 में 314.07 लाख मीट्रिक टन यूरिया का ऐतिहासिक उत्पादन दर्ज किया, जबकि वर्ष 2024–25 में 306.67 लाख मीट्रिक टन उत्पादन हुआ। सरकार ने पुनः स्पष्ट किया है कि अग्रिम योजना, उत्पादन क्षमता में विस्तार और सतत निगरानी के कारण देशभर में उर्वरकों की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।



