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आठ सहकारी बैंकों पर आरबीआई ने ठोका जुर्माना

आरबीआई ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए सोमवार को आठ कोऑपरेटिव बैंकों पर जुर्माना लगाया है।

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित, नरसिंहपुर (म.प्र.) (बैंक) पर बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (अधिनियम) और जमाकर्ता शिक्षण और जागरूकता निधि योजना, 2014 (योजना) के प्रावधानों के उल्लंघन/अननुपालन के लिए 1 लाख रुपये का मौद्रिक दंड लगाया है।

अमरावती मर्चेंट्स को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, अमरावती (बैंक) पर आरबीआई द्वारा शहरी सहकारी बैंकों को जारी धोखाधड़ी- वर्गीकरण और रिपोर्टिंग संबंधी निदेशों के उल्लंघन/अननुपालन के लिए 50,000 रुपये का मौद्रिक दंड लगाया है।

इसी तरह, भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने फ़ैज़ मर्कन्टाइल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, नासिक (महाराष्ट्र) (बैंक) पर आरबीआई द्वारा शहरी सहकारी बैंकों को जारी निदेशक मंडल और एक्सपोजर मानदंड तथा सांविधिक एवं अन्य प्रतिबंध- यूसीबी संबंधी निदेशों के उल्लंघन/अननुपालन के लिए 25,000 रुपये का मौद्रिक दंड लगाया है।

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने दि नवपल्ली को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, बारासात, 24 परगना (उत्तर), पश्चिम बंगाल (बैंक) पर ‘एक्सपोजर मानदंड तथा सांविधिक एवं अन्य प्रतिबंध- यूसीबी’ के तहत जारी निदेशों के उल्लंघन/अननुपालन के लिए 4 लाख रुपये का मौद्रिक दंड लगाया है।

मणिपुर विमेन्स को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, पौना बाज़ार, इंफाल, मणिपुर (बैंक) पर ‘एक्सपोजर मानदंड तथा सांविधिक एवं अन्य प्रतिबंध- यूसीबी’ के तहत जारी निदेशों के उल्लंघन/अननुपालन के लिए 2 लाख रुपये का मौद्रिक दंड लगाया है।

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने दिनांक 9 मार्च 2022 के आदेश द्वारा युनाइटेड इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, नगीना, यूपी (बैंक) पर बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 20 और 35ए के उल्लंघन के लिए 1 लाख रुपये का मौद्रिक दंड लगाया है।

आरबीआई ने दि भगत को-ऑपरेटिव बैंक लि., सोलन, हिमाचल प्रदेश (बैंक) पर पर्यवेक्षी कार्रवाई ढांचा (एसएएफ़) के अंतर्गत रिज़र्व बैंक द्वारा जारी विशिष्ट निदेशों का अनुपालन करने में बैंक की विफलता के लिए 3 लाख रुपये का मौद्रिक दंड लगाया है।

भारतीय रिज़र्व बैंक (रिज़र्व बैंक) ने दि नवनिर्माण को-ऑपरेटिव बैंक लि., अहमदाबाद (गुजरात) (बैंक) पर रिज़र्व बैंक द्वारा जारी ‘निदेशकों, रिश्तेदारों तथा फर्मों / प्रतिष्ठानों जिनमें उनकी रुचि हो को ऋण एवं अग्रिम’ व ‘निदेशकों आदि को ऋण एवं अग्रिम- प्रतिभू/ गारंटीकर्ता के रूप में निदेशक- स्पष्टीकरण- यूसीबी’ पर निदेशों का उल्लंघन करने के लिए 1 लाख रुपये का मौद्रिक दंड लगाया है।

यह दंड रिज़र्व बैंक द्वारा जारी उपर्युक्त निदेशों के अनुपालन करने में बैंक की विफलता को ध्यान में रखते हुए बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 46 (4) (i) और धारा 56 के साथ पठित धारा 47ए(1)(सी) के प्रावधानों के तहत रिज़र्व बैंक को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लगाया गया है।

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