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छत्तीसगढ़ में सहकारिता द्वारा किसानों का बचाव

हाल ही में भारी वर्षा से छत्तीसगढ़ में किसानों के लिए भारी समस्याएं उत्पन्न हो गई हैं. किसानों का अनाज गीला हो गया है और सड़ने का खतरे बढ़ गया है.  लेकिन राज्य सरकार ने सहकारी समितियों और अन्य सरकारी एजेंसियों के माध्यम से वर्षा से लथपथ अनाज की खरीद के द्वारा इस समस्या से निपटने के लिए कदम उठा रखा है.  सरकार ने 2011-12 में 50 लाख टन से अधिक अनाज की खरीद का फैसला किया है.

मुख्यमंत्री रमन सिंह ने व्यक्तिगत रूप से अनाज खरीद के पर्यवेक्षण पर ध्यान दिया है और अधिकारियों को आपात स्थिति में तैयार रहने का निर्देश दिया है.  धान की खरीद का कार्यक्रम, विशेष रूप से सहकारिता के माध्यम, से सफल रहा जिसकी मुख्यमंत्री रमन सिंह ने सराहना की हैं.

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  1. आज दिनांक 3/02/2012 आज हम सभी कम्‍प्‍युटर आपरेटर हडताल मे जाने वाले थे लेकिन पंजीयक ने एक आदेश जारी किया है कि जो आपरेटर हडताल मे जाएगा उसे तत्‍काल सेवा से मूक्‍त कर दिया जाएगा तो ये कहां तक ठीक है क्‍या हम अपने अधिकारो के लिय इनसे लड नही सकते ऐ कोन सा नियम है जिसके कारण हम हडताल नही कर सकते जबकी भारत के हर नागरीक कर्मचारी को अधिकार है कि वे अपनी मंगो को लेकर भारत मे कभी भ ओर कहीं भी हडताल कर सकते है ये हमे सहकारीता नियम का हवाला देकर कहते है कि आप अपने कार्य स्‍थल मे जाकर तुरंत अपना काम चालू कर दे नही तो आप जितने भी हडताल मे जाऐंगे उन सब को समिति मे एक प्रस्‍ताव करके निकाल दिया जाएगा यहां छत्‍तीसगढ मे जितनी भी सोसाईटी है उनमे कार्यरत सभी कर्मचारीयो का बडे अधिकारी शोषण कर रहे है और जब वे कुछ बोलना चाहते है तो उनकी आवाज दबा दि जाती है ये कहो का कानुन है आज अन्‍ना कहते है कि भ्रष्‍टाचार हटाओ लकिन भ्रष्‍टाचार कहा से उत्‍पन्‍न होती ये नही देखते जबकी भ्रष्‍टाचार का मेन स्रोत तो कहकारीता विभाग है क्‍योकि यहां इतनी राजनीति है कि कोई भी कीसी भी बात के लिए नेताओ का सहारा लेता है और वाजीब भी है क्‍योकि यहां नेताओ का ही बोलबाला है

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