
प्याज की कीमतों को स्थिर करने और उपभोक्ताओं को किफायती दर पर प्याज उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार ने पहल की है। दिल्ली-एनसीआर में बफर स्टॉक का प्याज 35 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खुदरा दुकानों और मोबाइल बिक्री केंद्रों के जरिए उपलब्ध कराया जा रहा है। इस अभियान को जमीन पर उतारने में नेफेड और एनसीसीएफ की अहम भूमिका है।
सरकार की रणनीति का उद्देश्य मौसमी उतार-चढ़ाव के दौरान प्याज की उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों में अचानक बढ़ोतरी की स्थिति में उपभोक्ताओं को राहत देना है। नेफेड और एनसीसीएफ अपने खरीद, भंडारण, परिवहन और वितरण नेटवर्क के जरिए बफर स्टॉक को जरूरत वाले बाजारों तक पहुंचा रहे हैं।
इस व्यवस्था को ‘कांदा एक्सप्रेस’ से भी मजबूती मिली है। इसके जरिए प्याज उत्पादक क्षेत्रों से प्रमुख खपत केंद्रों तक बफर प्याज रेल और सड़क मार्ग से पहुंचाया जा रहा है। वर्ष 2024-25 में 14 रेलवे रेक के माध्यम से करीब 12,000 मीट्रिक टन प्याज पांच शहरों तक पहुंचाया गया था। वहीं 2025-26 में इसका बड़े स्तर पर विस्तार हुआ और 86 रेलवे रेक के जरिए करीब 88,000 मीट्रिक टन प्याज 16 शहरों तक पहुंचाया गया।
वर्तमान अभियान में रेल और सड़क दोनों माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा है। बफर स्टॉक के वैज्ञानिक भंडारण और बेहतर वितरण के लिए केंद्रीय भंडारण निगम (सीडब्ल्यूसी) को भी इस व्यवस्था से जोड़ा गया है।
प्याज बाजार में सहकारी संस्थाओं की भूमिका इससे पहले भी महत्वपूर्ण रही है। वर्ष 2024 में नेफेड और एनसीसीएफ ने बफर स्टॉक के लिए करीब 6.4 लाख टन प्याज की खरीद की थी। इसके बाद जरूरत के अनुसार प्याज बाजार में उतारा गया और कई प्रमुख खपत केंद्रों पर 35 रुपये प्रति किलो की दर से खुदरा बिक्री की गई।
इस पूरी व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण पहलू किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के हितों से जुड़ा है। नेफेड और एनसीसीएफ के जरिए किसानों को उनकी उपज के लिए बाजार मिलता है, जबकि कीमतों में तेज उछाल के समय बफर स्टॉक जारी कर उपभोक्ताओं को राहत दी जाती है।
जुलाई 2026 में सरकार ने मूल्य स्थिरीकरण बफर के तहत प्याज की खरीद कीमत में 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर 2,125 रुपये प्रति क्विंटल कर दी थी। इससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने के साथ सरकार की बाजार स्थिरीकरण व्यवस्था को भी मजबूती मिली है।
प्याज की कीमतें आमतौर पर मौसम, उत्पादन चक्र और अलग-अलग फसलों की बाजार में आवक के बीच अंतर से प्रभावित होती हैं। ऐसे में बफर स्टॉक, तेज परिवहन और मजबूत वितरण नेटवर्क के जरिए सरकार का प्रयास कीमतों में अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करना है।
नेफेड और एनसीसीएफ की बढ़ती भूमिका यह भी दिखाती है कि मजबूत सहकारी आपूर्ति तंत्र के जरिए आवश्यक कृषि जिंसों के बाजार में समय पर हस्तक्षेप कर किसानों को बाजार और उपभोक्ताओं को राहत, दोनों सुनिश्चित किए जा सकते हैं।



