
राजस्थान विधानसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में सरकार ने बताया है कि राज्य और जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों के कर्मचारियों को एमसीए और एमएससी (आईटी) जैसी शैक्षणिक योग्यताओं के आधार पर अतिरिक्त वेतन वृद्धि का लाभ देने से पहले उनकी डिग्रियों की वैधता का सत्यापन नहीं किया गया था। बाद में जांच के दौरान कुछ योग्यताएं निर्धारित मानदंडों के अनुरूप नहीं पाए जाने पर संबंधित बैंकों ने अतिरिक्त भुगतान की वसूली की प्रक्रिया शुरू की।
यह जानकारी राजस्थान विधानसभा की 16वीं विधानसभा के पांचवें सत्र के दौरान विधायक चेतन पटेल कोलाना द्वारा पूछे गए सवाल के लिखित जवाब में सहकारिता विभाग ने दी।
सहकारिता विभाग के अनुसार, वर्तमान में राज्य सहकारी बैंक और जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों में एमसीए तथा एमएससी (आईटी) जैसी योग्यताओं के आधार पर अतिरिक्त वेतन वृद्धि देय नहीं है। हालांकि, पूर्व में लागू वेतन समझौतों के तहत इन योग्यताओं के आधार पर कर्मचारियों को अतिरिक्त वेतन वृद्धि का लाभ दिया गया था।
विभाग ने स्वीकार किया कि अतिरिक्त वेतन वृद्धि स्वीकृत किए जाने के समय संबंधित शैक्षणिक डिग्रियों की वैधता का सत्यापन नहीं किया गया था। बाद में योग्यताओं की जांच में कुछ डिग्रियां निर्धारित मानदंडों के अनुरूप नहीं पाए जाने पर वेतन का पुनर्निर्धारण किया गया और अतिरिक्त भुगतान की वसूली शुरू की गई।
विधानसभा में प्रस्तुत जिला-वार विवरण के अनुसार, राजस्थान राज्य सहकारी बैंक (अपेक्स बैंक) सहित कई जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों के कर्मचारियों ने एमसीए और एमएससी (आईटी) की योग्यता के आधार पर अतिरिक्त वेतन वृद्धि का लाभ लिया था।
राजस्थान राज्य सहकारी बैंक (अपेक्स बैंक) में शैक्षणिक योग्यताओं के सत्यापन के बाद 107.42 लाख रुपये की राशि ब्याज सहित वसूल की गई। विधानसभा को यह भी बताया गया कि 14वें वेतन समझौते के बाद अतिरिक्त वेतन वृद्धि का लाभ लेने वाले 22 कर्मचारियों का वेतन पुनर्निर्धारित किया गया और अतिरिक्त भुगतान की राशि ब्याज सहित वसूल की गई।
इसी तरह जयपुर केंद्रीय सहकारी बैंक में 15वें वेतन समझौते के तहत वेतन पुनर्निर्धारण के बाद 24 कर्मचारियों से 51 लाख रुपये की वसूली की गई।
विधानसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक अजमेर, अलवर, दौसा, हनुमानगढ़, झालावाड़, कोटा, पाली, सीकर, श्रीगंगानगर और उदयपुर के जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों में भी अतिरिक्त वेतन वृद्धि के मामलों में वसूली की कार्रवाई की गई है।
मामला केवल प्रशासनिक स्तर तक सीमित नहीं रहा। विभाग ने बताया कि कुछ कर्मचारियों ने डिग्री सत्यापन की प्रक्रिया को राजस्थान उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। इन मामलों में अदालत द्वारा अंतरिम राहत दिए जाने के कारण कुछ प्रकरण अभी न्यायिक विचाराधीन हैं।



