
केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय के अपीलीय प्राधिकरण एवं सेंट्रल रजिस्ट्रार ऑफ कोऑपरेटिव सोसायटी (सीआरसीएस) ने महाराष्ट्र की लातूर बहु-राज्यीय सहकारी ऋण समिति लिमिटेड द्वारा दायर उस अपील पर सुनवाई शुरू कर दी है, जिसमें राजलक्ष्मी बहु-राज्यीय सहकारी ऋण समिति लिमिटेड, यवतमाल को सावधि जमा (एफडी) की राशि तथा उस पर देय ब्याज का भुगतान करने संबंधी सहकारी लोकपाल के आदेश को चुनौती दी गई है।
यह अपील बहु-राज्यीय सहकारी समितियां अधिनियम, 2002 की धारा 85ए(3) के तहत दायर की गई है। इसमें 3 अक्टूबर 2025 को सहकारी लोकपाल द्वारा पारित उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें लातूर स्थित समिति को 30 दिनों के भीतर बकाया सावधि जमा राशि तथा उस पर देय ब्याज का भुगतान करने का निर्देश दिया गया था।
मामले की सुनवाई 21 जुलाई 2026 को शिव पाल सिंह, अपीलीय प्राधिकरण एवं सेंट्रल रजिस्ट्रार ऑफ कोऑपरेटिव सोसायटी, के समक्ष हुई।
सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता समिति ने तर्क दिया कि सावधि जमा की शेष राशि दोनों सहकारी समितियों के बीच हुए संविदात्मक दायित्वों और आपसी व्यवस्थाओं के कारण रोकी गई थी। वहीं, प्रतिवादी समिति ने इन दावों का विरोध किया।
अपीलीय प्राधिकरण ने कहा कि अपीलकर्ता द्वारा किए गए संविदात्मक दावों का परीक्षण दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर ही किया जा सकता है। इसलिए अपील के गुण-दोष पर निर्णय लेने से पहले संबंधित दस्तावेजों का रिकॉर्ड पर उपलब्ध होना आवश्यक है।
सोमवार को जारी अंतरिम आदेश में लातूर बहु-राज्यीय सहकारी ऋण समिति लिमिटेड को निर्देश दिया गया है कि वह 15 दिनों के भीतर अपने विस्तृत लिखित तर्क, सभी संबंधित दस्तावेजों और साक्ष्यों के साथ प्रस्तुत करे। साथ ही, इनकी प्रतियां प्रतिवादी समिति को भी उपलब्ध कराए।
वहीं, राजलक्ष्मी बहु-राज्यीय सहकारी ऋण समिति लिमिटेड को निर्देश दिया गया है कि वह अपीलकर्ता की लिखित दलीलें प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर अपना जवाब तथा संबंधित दस्तावेज दाखिल करे और उसकी अग्रिम प्रति अपीलकर्ता को भी उपलब्ध कराए।
अपीलीय प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि दोनों पक्षों की लिखित दलीलों और दस्तावेजों का आदान-प्रदान पूरा होने के बाद मामले को अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। अंतिम सुनवाई की तिथि और समय की सूचना दोनों पक्षों को अलग से दी जाएगी।



