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एआई, सहकारी बैंकों के विकास का सशक्त माध्यम: फुकन

असम राज्य सहकारी बैंक के अध्यक्ष बिस्वजीत फुकन ने कहा कि तेजी से बदलते बैंकिंग परिदृश्य में प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए सहकारी बैंकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाना होगा। उन्होंने शनिवार को लखनऊ में आयोजित एक शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही।

फुकन ने कहा कि तकनीक को अपनाना अब सहकारी बैंकों के लिए विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुका है। उन्होंने कहा, “आज पूरे बैंकिंग उद्योग में एआई की चर्चा हो रही है। यदि सहकारी बैंक एआई और नई तकनीकों की दिशा में आगे नहीं बढ़ते हैं, तो बड़े वाणिज्यिक बैंक लगातार अपना विस्तार करते रहेंगे और हमारे बाजार हिस्से पर कब्जा कर लेंगे।”

हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई को खतरे के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। फुकन ने कहा, “एआई हमारा दुश्मन नहीं है। सहकारी बैंकों की सबसे बड़ी ताकत किसानों, स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और प्राथमिकता क्षेत्र के उधारकर्ताओं के साथ उनका गहरा जुड़ाव है। यदि इस जमीनी संपर्क को एआई-आधारित समाधानों के साथ जोड़ा जाए, तो सहकारी बैंक और अधिक प्रगति कर सकते हैं।”

उन्होंने कहा कि तकनीकी बदलाव की गति बेहद तेज है और जो बातें कुछ समय पहले तक असंभव लगती थीं, वे आज कुछ ही महीनों में वास्तविकता बन रही हैं। ऐसे में सहकारी बैंकों को उस भविष्य के लिए तैयार रहना होगा, जहां डिजिटल परिवर्तन बैंकिंग परिचालन के हर पहलू को प्रभावित करेगा।

फुकन के अनुसार, युवा ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए बैंकिंग सेवाओं और प्रक्रियाओं का आधुनिकीकरण आवश्यक है। उन्होंने कहा कि चूंकि ऋण वितरण सहकारी बैंकों का मुख्य व्यवसाय है, इसलिए एआई की मदद से ऋण मूल्यांकन, ग्राहक पहुंच और प्राथमिकता क्षेत्र को ऋण प्रदान करने की दक्षता में उल्लेखनीय सुधार किया जा सकता है।

रोजगार पर एआई के प्रभाव संबंधी चिंताओं के जवाब में उन्होंने कहा कि एआई को कर्मचारियों के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि एक सहयोगी प्रणाली के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “तकनीक और कर्मचारियों को साथ-साथ आगे बढ़ना होगा। एआई बैंकों की कार्यकुशलता बढ़ाने में मदद कर सकता है, जबकि कर्मचारी अधिक मूल्यवर्धित कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।”

फुकन ने कहा कि एआई में धोखाधड़ी की पहचान, साइबर सुरक्षा, जोखिम प्रबंधन और ग्राहक सेवा को मजबूत करने की अपार क्षमता है। इससे ग्राहकों की संतुष्टि बढ़ेगी और बैंकों की परिचालन क्षमता भी सुदृढ़ होगी।

असम का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि गुवाहाटी के एक बैंक ने न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप वाली एआई-संचालित शाखा शुरू की है, जो बैंकिंग क्षेत्र में उन्नत तकनीक की संभावनाओं को दर्शाती है।

हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि एआई और अन्य आधुनिक तकनीकों को लागू करने की लागत सहकारी बैंकों के लिए एक बड़ी चुनौती है। इस समस्या के समाधान के लिए उन्होंने एक साझा प्रौद्योगिकी मंच विकसित करने की वकालत की, जिससे सहकारी संस्थाएं कम लागत पर आधुनिक डिजिटल समाधान प्राप्त कर सकें और साथ ही अपनी सहकारी पहचान भी बनाए रख सकें।

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