ताजा खबरें

ईईजेड एक्सेस पास लॉन्च; मत्स्य सहकारी संस्थाएं हैं केंद्र में

केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह ने गुजरात के वेरावल स्थित केसीसी मैदान में विशेष आर्थिक क्षेत्र में मत्स्य आखेट के लिए प्रवेश पास योजना का शुभारंभ किया। इस अवसर पर राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल, राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन, मत्स्य विभाग के केंद्रीय सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी तथा गुजरात सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में सभी तटीय राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों की 24 मत्स्य सहकारी समितियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। दो हजार से अधिक प्रतिभागी प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित रहे, जबकि 500 से अधिक स्थानों से मत्स्य सहकारी समितियां और मछली किसान उत्पादक संगठन ऑनलाइन माध्यम से जुड़े। यह आयोजन अपतटीय मत्स्य क्षेत्र के विस्तार में सहकारिता आधारित मॉडल को केंद्र में रखने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

केंद्रीय मंत्री ने 24 मत्स्य सहकारी समितियों का प्रतिनिधित्व करने वाले 37 मछुआरों को विशेष आर्थिक क्षेत्र में मत्स्य आखेट हेतु प्रवेश पास प्रदान किए। इसके साथ ही मछुआरों को जीवन रक्षक जैकेट, उच्च क्षमता वाली टॉर्च और वैश्विक स्थिति निर्धारण प्रणाली उपकरण सहित सुरक्षा किट वितरित किए गए, जिससे अपतटीय गतिविधियां सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संचालित की जा सकें। गुजरात की नवगठित मत्स्य सहकारी समितियों को दो लाख रुपये का अनुदान भी प्रदान किया गया।

अपने संबोधन में सिंह ने कहा कि विशेष आर्थिक क्षेत्र का यह ढांचा मछुआरा संघों, सहकारी समितियों, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और वैज्ञानिक संस्थानों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है, ताकि पारदर्शी, समावेशी और भविष्य उन्मुख व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।

उन्होंने मछुआरों से सहकारी समितियों में संगठित होकर प्रवेश पास के लिए आवेदन करने और नई व्यवस्था का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि बजट घोषणा 2026 के अनुसार विशेष आर्थिक क्षेत्र अथवा खुले समुद्र में भारतीय पोतों द्वारा पकड़ी गई मछली शुल्क-मुक्त रहेगी, जिससे सहकारी संस्थाओं की आय में वृद्धि होगी।

राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने कहा कि प्रवेश पास प्रणाली सरल, पारदर्शी और पूर्णतः डिजिटल स्वरूप में विकसित की गई है। राज्य मंत्री श्री जॉर्ज कुरियन ने इसे विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में समुद्री मत्स्य क्षेत्र को सशक्त बनाने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया।

केंद्रीय सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने कहा कि लगभग 24 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला भारत का विशेष आर्थिक क्षेत्र अभी भी पर्याप्त रूप से उपयोग में नहीं लाया जा सका है, जबकि उच्च मूल्य वाली प्रजातियों की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। विभाग का विशेष ध्यान सतत विकास, प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण तथा मत्स्य सहकारी समितियों को मजबूत करने पर केंद्रित है।

उल्लेखनीय है कि 4 नवंबर 2025 को अधिसूचित विशेष आर्थिक क्षेत्र में मत्स्य पालन के सतत दोहन संबंधी नियमों के अंतर्गत यह पहल लागू की गई है, जिसका उद्देश्य अपतटीय मत्स्य पालन का विस्तार करते हुए सहकारिता आधारित, टिकाऊ और मछुआरा-केंद्रित नीली अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना है।

Tags
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Close