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केंद्र की हर पंचायत और गांव तक सहकारिता विस्तार की योजना

केंद्र सरकार ने अगले पांच वर्षों में देश की प्रत्येक पंचायत और गांव तक सहकारिता का दायरा बढ़ाने के उद्देश्य से नए बहुउद्देश्यीय प्राथमिक कृषि ऋण समितियों, दुग्ध और मत्स्य सहकारी समितियों की स्थापना की एक महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दी है। केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को लोकसभा को यह जानकारी दी।

लिखित उत्तर में मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस (एनसीडी) के अनुसार 20 जनवरी 2026 तक देशभर में 32,802 नई पैक्स, दुग्ध एवं मत्स्य सहकारी समितियां पंजीकृत की जा चुकी हैं, जबकि 15,793 मौजूदा दुग्ध और मत्स्य सहकारी समितियों को सशक्त बनाया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नई गठित सहकारी समितियों का स्वतंत्र या तृतीय-पक्ष मूल्यांकन अभी प्रस्तावित नहीं है।

शाह ने कहा कि सरकार एनसीडी के माध्यम से राज्य-वार और क्षेत्रीय विश्लेषण कर रही है, ताकि सहकारी कवरेज में मौजूद अंतराल, आकांक्षी जिलों और वंचित क्षेत्रों की पहचान की जा सके और सहकारी नेटवर्क का संतुलित विस्तार सुनिश्चित हो।

डिजिटलीकरण पर जोर देते हुए मंत्री ने बताया कि देशभर में स्वीकृत 79,630 पैक्स में से अब तक 61,478 पैक्स का डिजिटलीकरण किया जा चुका है। इन समितियों को साझा कोर बैंकिंग समाधान (सीबीएस), आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (एईपीएस), यूपीआई और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है, जिससे सहकारी बैंकिंग सेवाओं का आधुनिकीकरण हो सके।

शासन और समावेशन को मजबूत करने के लिए पैक्स के लिए मॉडल उपविधियां तैयार कर सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को भेजी गई हैं। इनका उद्देश्य पैक्स को बहुउद्देश्यीय, पारदर्शी और समावेशी संस्थाओं में बदलना है, जिनमें व्यापक सदस्यता के साथ महिलाओं और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति का पर्याप्त प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है।

मंत्री ने बताया कि बहु-राज्य सहकारी समितियां (संशोधन) अधिनियम, 2023 के तहत बहु-राज्य सहकारी समितियों के बोर्ड में महिलाओं के लिए दो और अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए एक सीट आरक्षित की गई है। राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025 में भी महिलाओं और कमजोर वर्गों को नेतृत्वकारी भूमिका देने पर विशेष जोर दिया गया है। वर्ष 2025 के अंत तक 32 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने मॉडल उपविधियों के अनुरूप अपने कानूनों को अपनाया या उनके साथ समन्वय किया है।

संशोधित पैक्स ढांचे के तहत समितियों को बहुउद्देश्यीय सेवा केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों को सस्ती ऋण सुविधा, गुणवत्तापूर्ण इनपुट और अन्य सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकें।

किसानों की आय बढ़ाने के लिए पैक्स को भंडारण, कस्टम हायरिंग सेंटर और प्राथमिक प्रसंस्करण जैसी गतिविधियां अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को सशक्त करने के लिए स्वयं शक्ति सहकार योजना और नंदिनी सहकार जैसी योजनाओं के माध्यम से महिला-नेतृत्व वाली सहकारी समितियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

महाराष्ट्र में कार्यान्वयन की जानकारी देते हुए शाह ने बताया कि राज्य में 12,178 पैक्स के कम्प्यूटरीकरण को मंजूरी दी गई है, जिनके लिए हार्डवेयर, ईआरपी प्रणाली, प्रशिक्षण और सहायता हेतु 130.73 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। जलगांव जिले की सभी 352 स्वीकृत पैक्स को राष्ट्रीय ईआरपी-आधारित सॉफ्टवेयर पर पूरी तरह ऑनबोर्ड कर 100 प्रतिशत डिजिटलीकरण हासिल किया गया है।

मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) के माध्यम से महाराष्ट्र में सहकारी संस्थाओं को अब तक कुल 13,575.28 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी गई है, जिससे मुख्य रूप से चीनी, वस्त्र और मत्स्य क्षेत्रों को लाभ हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना के तहत कई पैक्स ने गोदाम निर्माण पूरा कर लिया है, जिससे किसानों को मजबूरी में फसल बेचने से बचने और बेहतर मूल्य प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

क्षेत्रीय परिदृश्य साझा करते हुए शाह ने बताया कि कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले में 121 पैक्स, 420 दुग्ध सहकारी समितियां और 22 मत्स्य सहकारी समितियां स्थापित की जा चुकी हैं, और सभी पैक्स का डिजिटलीकरण शुरू कर दिया गया है।

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