नेफेड पुनरुत्थान से फिशकोफॉड में जगी उम्मीद की किरण

नेफेड के पुनर्जीवित होने के बाद कई मृत और कमजोर सहकारी समितियां जैसे मत्स्य सहकारी समितियों की शीर्ष संस्था फिशकोफॉड में उम्मीद की एक नई किरण जगी है। अगर नेफेड पुनर्जीवित हो सकती है तो हम क्यों नहीं, फिशकोफॉड के एमडी बी.के.मिश्रा ने पूछा।

पाठकों को ज्ञात होगा कि हाल ही में नेफेड ने अनाज की खरीद पर सर्विस चार्ज पाकर अपने सभी उधारदाताओं को बकाया राशि का भुगतान किया था।

पिछले कई सालों तक फिशकोफॉड का वित्तीय स्वस्थ ठीक-ठाक था लेकिन इसकी परेशानी तब शुरू हो गई जब मछुआरों का बीमा कराने पर सर्विस चार्ज का मामला सरकार के पास लंबित पड़ने लगा। पिछले पांच सालों से ये परेशान है और पैसों की कमी की वजह से कर्मचारियों को वेतन देने के साथ-साथ अपने कार्यालयों का संचालन करना फिशकोफॉड के लिए चुनौती बन चुना है।

पाठकों को याद होगा कि फिशकोफॉड को मछुआरों का बीमा करने के लिए नोडल एजेंसी बनाया गया था और इस वित्तीय वर्ष तक फिशकोफॉड ने 42 लाख लोगों का बीमा करने का उल्लेखनीय काम किया है। अगले साल तक इस आंकड़े को 4 लाख और बढ़ाने का लक्ष्य है, एमडी ने दावा किया।

बीमा योजना का काम निपटाने के लिए फिशकोफॉड ने 8 राज्यों में 40 से अधिक कर्मचारियों को इन कार्यालयों में काम करने के लिए नियुक्त किया है। “हम श्रम या शहरी सहकारी बैंकों की तरह नहीं है जिनके पास सिर्फ एक कार्यालय है, हमारे पास आठ कार्यालय हैं और वास्तव में सरकार के समर्थन के बिना इन्हें चलाना काफी मुश्किल है”, मिश्रा ने दुखी भाव में कहा।

एमडी ने आगे कहा कि वह सरकार से किसी भी अनुदान की मांग नहीं कर रहे हैं। ''मैं केवल सरकार से अनुरोध करता हूं कि वे हमारी देनदारियां का निपटारा करे जो पांच साल से लंबित है''। उन्होंने कहा कि सर्विस चार्ज का मुद्दा सरकार द्वारा ही अनुमोदित किया गया था।

मिश्रा ने कहा कि “आज यह जानकर अच्छा लगता है कि नेफेड पुनर्जीवित हो गई है। दिल्ली के आश्रम चौक पर स्थित नेफेड की चमचमाती इमारत सहकारिता का गौरव है। लेकिन यह तभी पुनर्जीवित हुई जब सरकार ने सर्विस चार्ज का भुगतान किया और नेफेड को खरीद का काम दिया गया। हम मंत्रालय द्वारा अनुमोदित केवल एक प्रतिशत सर्विस चार्ज की ही मांग कर रहे हैं”।

केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह के साथ कई बैठकों के बावजूद फिशकोफॉड सरकार से सर्विस चार्ज पाने में नाकाम रही है। सूत्रों का कहना है कि इस मामले में केंद्रीय कृषि मंत्री के निर्देश अभी तक मंत्रालय द्वारा पूरा किया जाना बाकि है।

वहीं मिश्रा ने दावा किया कि “अगर एनडीए सरकार देश में 2020 तक नीली क्रांति लाना चाहती है तो फिशकोफॉड इसमें अहम भूमिका निभा सकती है”।

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